विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि फरवरी से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान अब तक 22 भारतीयों की मौत हो चुकी है. इनमें 14 नाविक शामिल हैं. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय के लगातार संपर्क में है.
‘स्क्रोल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता और कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए. इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए.
संघर्ष शुरू होने के बाद से क्षेत्र में भारतीय नाविकों को ले जा रहे कई जहाजों पर हमले हुए हैं. मरने वाले कई नाविक विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर काम कर रहे थे.
15 जून को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई रोकने और वाणिज्यिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के उद्देश्य से एक अंतरिम समझौता हुआ था. इसके बाद दोनों देशों ने स्विट्जरलैंड में भी बातचीत की. इस वार्ता का उद्देश्य दो महीने के भीतर स्थायी शांति समझौते तक पहुँचना था.
हालाँकि, 9 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संघर्षविराम समाप्त होने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए हमले किए. यह घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर ईरान के कथित हमलों के बाद सामने आया. इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर में कई ठिकानों पर हमले किए.
सऊदी अरब में भी तीन भारतीयों की मौत
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को यह भी बताया कि सऊदी अरब में तीन अन्य भारतीयों की मौत हुई है.
रिपोर्ट के अनुसार, यमन के हूती विद्रोही समूह ने इसी महीने सऊदी अरब पर कई हमले किए हैं. इनमें रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुआ हमला भी शामिल है, जिसे हाल के वर्षों में सऊदी अरब पर हुआ सबसे घातक हमला बताया गया है.
इन हमलों से ईरान समर्थित हूती समूह और सऊदी अरब के बीच संघर्ष और तेज हो गया है. हूती समूह यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को सत्ता से हटाने की कोशिश कर रहा है, जबकि सऊदी अरब उस सरकार का समर्थन करता है.

