जेल में बंद 25 लोग भी सीजेपी प्रदर्शन में ‘दिखे’, चेहरे की पहचान प्रणाली पर उठे सवाल

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा में कथित पेपर लीक के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शनों से जुड़ी सभी प्राथमिकी रद्द कर दीं. हालांकि, उसने दिल्ली पुलिस को उन 2,873 लोगों के खिलाफ आगे बढ़ने की अनुमति दी, जिनके बारे में पुलिस ने दावा किया था कि उनके आपराधिक रिकॉर्ड हैं और 20 से 26 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर हुए मुख्य प्रदर्शन स्थल पर चेहरे की पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर के जरिये उनकी पहचान की गई.

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल चेहरे की पहचान के आधार पर कार्रवाई नहीं होगी. किसी भी कार्रवाई से पहले मौके पर जाकर सत्यापन किया जाएगा.

लेकिन गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लोगों की पड़ताल से एक अलग तस्वीर सामने आई. हत्या, हत्या के प्रयास, दुष्कर्म और बच्चों के यौन शोषण जैसे मामलों में आरोपी कम से कम 25 लोग ऐसे पाए गए, जिन्हें जंतर-मंतर पर चेहरे की पहचान करने वाले तंत्र ने प्रदर्शन में मौजूद बताया था, जबकि पुलिस, जेल और अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार वे उस समय जेल में थे.

पुलिस के हलफनामे में दर्ज 2,873 लोगों में से इंडियन एक्सप्रेस ने हत्या, हत्या के प्रयास और दुष्कर्म के आरोपियों पर ध्यान केंद्रित किया. इस श्रेणी में कुल 205 लोग शामिल थे. इनमें हत्या के 101, दुष्कर्म के 61, बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम के तहत छह और हत्या के प्रयास के 62 में से 37 आरोपी शामिल थे.

इन 205 लोगों में से 17 पर हत्या, चार पर दुष्कर्म और चार पर हत्या के प्रयास के मामले दर्ज थे. रिकॉर्ड के अनुसार, जब चेहरे की पहचान करने वाले तंत्र ने उन्हें जंतर-मंतर पर मौजूद बताया, उस समय वे दिल्ली की तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेल परिसरों में बंद थे.

इन 25 लोगों में से तीन की पहचान 24 जुलाई, 21 की 25 जुलाई और एक की 26 जुलाई को हुई थी. 26 जुलाई जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आखिरी दिन था.

सोमवार को इंडियन एक्सप्रेस के सवालों के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान 2,873 लोगों की पहचान प्रथम दृष्टया आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों के रूप में हुई. हालांकि, इस संबंध में आगे का सत्यापन अभी लंबित है.

17 अगस्त को उच्चतम न्यायालय में दाखिल पुलिस के हलफनामे के अनुसार, चेहरे की पहचान करने वाले तंत्र ने उन लोगों की पहचान की, जिनका चेहरा और अन्य विवरण आधिकारिक पुलिस डेटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड से मेल खाते थे. इनमें 2,402 लोगों की पहचान दिल्ली पुलिस के जैविक पहचान डेटाबेस ‘क्राइम कुंडली’ के जरिये और 471 लोगों की पहचान आपराधिक रिकॉर्ड के आधार पर की गई.

चेहरे की पहचान से चिह्नित 25 लोग पहले से जेल में थे

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा सत्यापित सभी 25 लोगों के अदालत और जेल रिकॉर्ड बताते हैं कि उनकी हिरासत की तारीख प्रदर्शन से कई सप्ताह, महीने या कुछ मामलों में वर्षों पहले की थी. इसके बावजूद पुलिस के पहचान संबंधी रिकॉर्ड 24 से 26 जुलाई के हैं.

हत्या के आरोप में जेल में बंद उन 17 लोगों का विवरण इस प्रकार है, जिन्हें प्रदर्शन के दौरान चेहरे की पहचान करने वाले तंत्र ने मौजूद बताया.

1. किशन, 26 वर्ष24 जुलाई को शाम करीब 6 बजकर 36 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर से गिरफ्तार किशन पर सशस्त्र लूट के मामले भी हैं. उसे पहली बार 9 जुलाई 2022 को जेल भेजा गया था. इसके बाद 17 अक्टूबर 2023 को फिर जेल गया.

2. मुस्ताक, 29 वर्ष24 जुलाई को शाम करीब 6 बजकर 31 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर-पूर्वी दिल्ली के गोकुलपुरी से गिरफ्तार मुस्ताक पर झपटमारी और हत्या के प्रयास के मामले भी हैं. वह पहली बार 1 जनवरी 2024 को जेल गया और 23 जून 2026 को दोबारा जेल भेजा गया.

3. अंकित कुमार, 22 वर्ष24 जुलाई को शाम करीब 5 बजकर 58 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर दिल्ली के वजीराबाद से गिरफ्तार अंकित पहली बार 11 नवंबर 2022 को जेल गया था. इस वर्ष 24 जून को उसे फिर जेल भेजा गया.

4. योगेश, 27 वर्ष25 जुलाई को शाम करीब 4 बजकर 24 मिनट पर पहचान की गई. दक्षिण दिल्ली से गिरफ्तार योगेश पहली बार 17 नवंबर 2024 को जेल गया और 29 नवंबर 2024 को फिर जेल भेजा गया.

5. प्रताप सिंह सिसोदिया, 31 वर्ष25 जुलाई को शाम करीब 3 बजकर 35 मिनट पर पहचान की गई. पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके से एक सहयोगी के साथ गिरफ्तार किया गया. वह पहली बार 28 नवंबर 2014 को जेल गया था. बाद में कई बार जेल भेजा गया और 5 अगस्त 2026 को मंडोली से तिहाड़ जेल स्थानांतरित किया गया.

6. अर्जुन, 28 वर्ष25 जुलाई को दोपहर करीब 1 बजकर 48 मिनट पर पहचान की गई. पश्चिमी दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके से गिरफ्तार अर्जुन पहली बार 10 मार्च 2021 को जेल गया था. इसके बाद 9 मार्च 2023 को फिर जेल भेजा गया.

7. सोनू कुमार, 34 वर्ष25 जुलाई को रात करीब 8 बजकर 39 मिनट पर पहचान की गई. दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के ओखला औद्योगिक क्षेत्र से गिरफ्तार सोनू पहली बार 30 जनवरी 2020 को जेल गया था. 27 अक्टूबर 2025 को उसे दोबारा जेल भेजा गया.

8. विजय, 26 वर्ष25 जुलाई को रात करीब 11 बजकर 40 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके से गिरफ्तार विजय पहली बार 29 अगस्त 2024 को जेल गया था. इसके बाद 19 जनवरी 2026 को फिर जेल भेजा गया.

9. राकेश, 42 वर्ष25 जुलाई को दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से गिरफ्तार राकेश पर लूट, झपटमारी, चोरी और आबकारी अधिनियम के तहत भी मामले हैं. वह पहली बार 7 दिसंबर 2008 को जेल गया था और 18 फरवरी 2024 को फिर जेल भेजा गया.

10. भोला उर्फ श्याम कुमार, 32 वर्ष25 जुलाई को शाम करीब 4 बजकर 58 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से गिरफ्तार भोला पर झपटमारी और सेंधमारी के मामले भी हैं. वह पहली बार 26 अप्रैल 2015 को जेल गया था. इसके बाद 29 मार्च 2025 को फिर जेल भेजा गया.

11. राजा, 27 वर्ष25 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजकर 22 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर दिल्ली की सब्जी मंडी से गिरफ्तार राजा पहली बार 1 सितंबर 2020 को जेल गया था. उसे 1 जुलाई 2024 को फिर जेल भेजा गया.

12. विक्की उर्फ मनोज ठाकुर, 34 वर्ष25 जुलाई को रात करीब 11 बजकर 12 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर दिल्ली के कोतवाली इलाके से गिरफ्तार विक्की पहली बार 2 जनवरी 2015 को जेल गया था. इसके बाद 7 मई 2016 को फिर जेल भेजा गया.

13. मोहम्मद फराज, 23 वर्ष25 जुलाई को दोपहर करीब 2 बजकर 59 मिनट पर पहचान की गई. उत्तर दिल्ली के वजीराबाद से गिरफ्तार फराज पर लूट का अलग मामला भी है. वह पहली बार 20 जनवरी 2022 को जेल गया था और 9 अक्टूबर 2024 को फिर जेल भेजा गया.

14. मनीष, 28 वर्ष25 जुलाई को शाम करीब 4 बजकर 25 मिनट पर पहचान की गई. मध्य दिल्ली के रणजीत नगर इलाके से गिरफ्तार मनीष पहली बार 24 अप्रैल 2023 को जेल गया था. इसके बाद 23 अक्टूबर 2024 को फिर जेल भेजा गया.

15. धर्मेंद्र यादव, 37 वर्ष25 जुलाई को दोपहर करीब 1 बजकर 20 मिनट पर पहचान की गई. दिल्ली के द्वारका इलाके से हत्या के मामले में गिरफ्तार धर्मेंद्र पर चोरी और हत्या के प्रयास के मामले भी हैं. वह पहली बार 22 जुलाई 2016 को जेल गया था. 14 मई 2026 को उसे फिर जेल भेजा गया.

16. सोनू, 29 वर्ष25 जुलाई को शाम करीब 3 बजकर 44 मिनट पर पहचान की गई. शाहदरा जिले के जीटीबी एन्क्लेव से गिरफ्तार सोनू पर लूट के मामले भी हैं. वह पहली बार 11 फरवरी 2018 को जेल गया था और 26 अप्रैल 2022 को फिर जेल भेजा गया.

17. रॉयल मैसी, 25 वर्ष26 जुलाई को शाम करीब 5 बजकर 45 मिनट पर पहचान की गई. दक्षिण दिल्ली के तिगड़ी इलाके से गिरफ्तार रॉयल पहली बार 20 अगस्त 2021 को जेल गया था. इसके बाद 4 अप्रैल 2023 को फिर जेल भेजा गया.

इन मामलों में कम से कम एक मामला राजधानी में हुई चर्चित हत्या से जुड़ा है. योगेश उर्फ राजू को दक्षिण दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 में जिम संचालक नादिर शाह की हत्या में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था. रिकॉर्ड के अनुसार, वह लॉरेंस बिश्नोई और हाशिम बाबा के गिरोहों के लिए शूटर के रूप में काम करता था. मुठभेड़ के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उसके बाएं पैर में गोली लगी थी.

केवल चेहरे की पहचान के आधार पर कार्रवाई नहीं

दिल्ली पुलिस का चेहरे की पहचान करने वाला सॉफ्टवेयर सामने आने वाले चेहरों के चारों ओर चौकोर निशान बनाता है और उनकी तुलना पुलिस डेटाबेस में मौजूद तस्वीरों से करता है. 2022 में सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में पुलिस ने बताया था कि यदि तंत्र की सटीकता 80 प्रतिशत हो, तो वह मिलान को सकारात्मक मानता है.

हालांकि, यह परिणाम अपने आप में किसी व्यक्ति की पहचान का प्रमाण नहीं है. इसकी क्षमता इस्तेमाल किए गए एल्गोरिदम, कैमरे के कोण, रोशनी, तस्वीर की गुणवत्ता, चेहरे पर मास्क और जिस डेटाबेस में खोज की जा रही है, उस पर निर्भर करती है.

दिल्ली पुलिस ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में दाखिल किया था, जिनमें जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग और निगरानी के आरोप लगाए गए थे.

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली उत्तर जिले में सबसे अधिक 285 लोगों की पहचान की गई. इसके बाद बाहरी दिल्ली में 257, उत्तर-पश्चिम में 256, उत्तर-पूर्व में 174, पूर्वी दिल्ली में 173 और दक्षिण-पश्चिम में 166 लोगों की पहचान हुई. अन्य जिलों और इकाइयों में रेलवे, शाहदरा, मध्य दिल्ली, दक्षिण-पूर्व, पश्चिम, द्वारका, दक्षिण, रोहिणी, नई दिल्ली, अपराध शाखा, इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, मेट्रो और विशेष प्रकोष्ठ शामिल थे.

हालांकि, पुलिस के हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पहचाने गए लोग आरोपी थे, दोषी ठहराए जा चुके थे या केवल आपराधिक मामलों में नामजद थे.

हलफनामे में कहा गया कि पुलिस रिकॉर्ड में केवल उन्हीं आरोपियों का चेहरा और अन्य विवरण उपलब्ध होते हैं, जिन पर गंभीर अपराधों के मामले हैं. इसमें यातायात चालान या छोटे-मोटे उल्लंघनों जैसे मामलों को शामिल नहीं किया जाता.

पुलिस ने यह भी कहा कि चेहरे की पहचान करने वाले तंत्र के परिणाम के आधार पर अकेले कोई कार्रवाई नहीं की जाती. यह भीड़ में आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्ति की पहचान करने का पहला कदम है. चेहरा पहचाने जाने के बाद संबंधित व्यक्ति का मौके पर जाकर सत्यापन किया जाता है. यदि सत्यापन में यह पाया जाता है कि वह वास्तव में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद था, तभी आगे की कार्रवाई की जाती है.

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