चीन ने कहा कि वह लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को मान्यता नहीं देता; 28 नामकरण पर भारत के साथ तीखी बहस

भारत और चीन के बीच मंगलवार (13 अक्टूबर 2026) को लद्दाख में 28 भौगोलिक आकृतियों का नामकरण मानकीकृत करने के नई दिल्ली के फैसले को लेकर तीखी बहस हुई. इनमें से कुछ आकृतियाँ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित हैं, जहाँ चार साल तक चले गतिरोध के दौरान भारतीय सेना और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच झड़पें हुई थीं.

2 साल में पहली ऐसी बहस

सुहासिनी हैदर और अनंत कृष्णन की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बैठक के बाद दोनों देशों ने संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयास के तहत राजनयिक और यात्रा संपर्कों को बहाल किया था. उसके बाद से पिछले दो वर्षों में यह इस तरह का पहला विवाद है, जो यह दर्शाता है कि नक्शा (मानचित्र) अभी भी विवाद का एक प्रमुख बिंदु बना हुआ है.

चीन की यह टिप्पणी भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा लद्दाख में विशिष्ट भौगोलिक आकृतियों के नामों के मानकीकरण की घोषणा के 10 दिन बाद आई है. इसमें 11 चोटियाँ, पाँच पर्वत, छह भू-भाग, दो ग्लेशियर, दो दर्रे, एक घाटी, एक नदी, एक झील और एक अन्य जल निकाय शामिल हैं.

3 अक्टूबर को पहचाने गए स्थानों में गोगरा को "भू-भाग" और हॉटस्प्रिंग्स को "जल निकाय" के रूप में शामिल किया गया था. ये दोनों स्थान पेट्रोलिंग पॉइंट 15 (PP-15) से सटे हुए हैं, जहाँ जून 2020 में गलवान में हुई हिंसक झड़पों के बाद एलएसी पर भारत-चीन तनाव के दौरान भारी सैन्य तैनाती देखी गई थी. दोनों सेनाएँ सैन्य वापसी वार्ता की शृंखला के हिस्से के रूप में सितंबर 2022 में PP-15 पॉइंट से पीछे हटने पर सहमत हुई थीं.

भारत और चीन दोनों ही पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में आधिकारिक नक्शों में स्थानों का नामकरण करके और प्रशासनिक क्षेत्राधिकार बनाकर अपने क्षेत्रीय दावों को मजबूत करते रहे हैं. यह नक्शों के ज़रिए एक-दूसरे को जवाब देने की एक ऐसी प्रक्रिया है जो कई सालों से चली आ रही है.

इस साल मार्च में, चीन के पश्चिमी शिनजियांग क्षेत्र की स्थानीय सरकार ने अक्साई चिन क्षेत्र में "सेनलांग काउंटी" की स्थापना की घोषणा की थी, जिसे काशगर प्रभाग के तहत प्रशासित किया जाना है. इस काउंटी की स्थापना को कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने मंजूरी दी थी.  भारत अक्साई चिन में 38,000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर अपना दावा करता है, जो वर्तमान में चीन के नियंत्रण में है और शिनजियांग क्षेत्र के तहत प्रशासित है.

भारत ने तब कहा था कि वह "चीन द्वारा भारत के क्षेत्र का हिस्सा बनने वाले स्थानों को काल्पनिक नाम देने के किसी भी शरारतपूर्ण प्रयास को स्पष्ट रूप से खारिज करता है."

भारत ने अपने आधिकारिक नक्शों में अरुणाचल प्रदेश के शहरों और स्थानों के चीनी नाम जारी करने के चीन के कदमों को भी खारिज कर दिया है. बीजिंग पूर्वी क्षेत्र में 90,000 वर्ग किलोमीटर भूमि पर अपना दावा करता है.

चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार (13 अक्टूबर 2026) को कहा कि उसने 2019 में बनाए गए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को "कभी मान्यता नहीं दी" है और भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा क्षेत्रों के नामकरण को "अवैध और अमान्य" करार दिया—एक ऐसा आरोप जिसे नई दिल्ली ने सिरे से खारिज कर दिया.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है. चीनी पक्ष का कोई भी इनकार इस स्थापित तथ्य को बदल नहीं सकता." उन्होंने स्पष्ट किया, "भारतीय सर्वेक्षण विभाग के लद्दाख के नक्शे पर इन (28) स्थानों की औपचारिक पहचान का उद्देश्य उनकी सटीक पहचान और आम जनता के बीच बेहतर जागरूकता को सुविधाजनक बनाना है."

प्रवक्ता दिन में पहले चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा की गई टिप्पणियों का जवाब दे रहे थे. चीनी विदेश मंत्रालय की ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन ने "भारत द्वारा एकतरफा और अवैध रूप से स्थापित तथाकथित 'लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश' को कभी मान्यता नहीं दी है, और भारत द्वारा सार्वजनिक किए गए तथाकथित 'मानकीकृत नामों' का कड़ा विरोध करता है."

जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने और संविधान के अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने के भारत सरकार के 5 अगस्त 2019 के फैसले का संदर्भ देते हुए उन्होंने आगे कहा, "भारत का यह कदम अवैध और शून्य है, और इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि भारत-चीन सीमा का पश्चिमी क्षेत्र चीन का है."

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