नीट के बाद महाराष्ट्र में टीईटी का पेपर लीक, परीक्षा स्थगित; 3 गिरफ्तार

महाराष्ट्र में परीक्षाओं के पेपर धड़ाधड़ लीक हो रहे हैं, लेकिन डबल इंजन की सरकार कुछ नहीं कर पा रही है. पहले नीट 2026 के साथ ऐसा हुआ, और अब राज्य की टीईटी ने भी सरकार की विफलता उजागर कर दी. शनिवार तड़के भिवंडी के एक होटल में पेपर लीक के आरोपों में तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद, महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (एमएससीई) ने रविवार (28 जून) को होने वाली 'महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा' (टीईटी) को स्थगित कर दिया है.

सोहम शाह और मोहम्मद थावेर की खबर के अनुसार, एक नोट जारी करते हुए एमएससीई ने बताया कि पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की थी. इसके बाद पुलिस ने परिषद के अधिकारियों को मौके पर बुलाया, जिन्होंने इस बात की पुष्टि की कि तीनों व्यक्तियों के पास मौजूद प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से आंशिक रूप से (कुछ हद तक) मेल खा रहे थे.

दिलचस्प बात यह है कि एमएससीई के नोट की शुरुआत इस बात से होती है: "नीट 2026 परीक्षा के दौरान हुई गड़बड़ियों को ध्यान में रखते हुए, महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद द्वारा सभी सुरक्षा उपाय किए गए थे."

परिषद ने अभी तक यह घोषणा नहीं की है कि स्थगित की गई परीक्षा कब आयोजित की जाएगी. शिवसेना (यूबीटी) की युवा सेना के कल्पेश यादव ने आरोप लगाया कि इस लीक में शिक्षा विभाग के अधिकारियों के शामिल होने की प्रबल संभावना है और उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच सीआईडी को सौंपी जाए.

उल्लेखनीय है कि 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले के बाद टीईटी का महत्व काफी बढ़ गया है. कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि सभी नए और सेवारत (वर्तमान में कार्यरत) शिक्षकों के लिए इस परीक्षा को पास करना अनिवार्य है, अन्यथा उन्हें अपना पद गंवाना पड़ेगा. इस फैसले के बाद दिसंबर 2025 में आयोजित पहली परीक्षा में ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक 11 प्रतिशत पासिंग रेट (उत्तीर्ण प्रतिशत) देखा गया था, जबकि पिछले पांच वर्षों में यह पासिंग रेट पांच प्रतिशत से भी कम था.

सुप्रीम कोर्ट ने शुरुआत में सेवारत शिक्षकों को अपनी सेवा जारी रखने और टीईटी पास करने के लिए दो साल का समय (अगस्त 2027 तक) दिया था. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस परीक्षा को पास करने की समय सीमा को बढ़ाकर अगस्त 2028 कर दिया है.

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