त्रिपुरा के सिपाहीजाला जिले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिए जाने के विरोध में ग्रामीणों के एक समूह द्वारा किए गए हमले में एक सहायक कमांडेंट सहित कम से कम तीन बीएसएफ जवान घायल हो गए. ‘पीटीआई’ के अनुसार, कलमचौड़ा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आशाबारी सीमा चौकी के पास हुई इस घटना के सिलसिले में तीन महिलाओं सहित नौ ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया है. उग्र भीड़ ने बीएसएफ के एक वाहन में तोड़फोड़ की और सीमा सुरक्षा बलों से हथियार छीनने का प्रयास किया.
इस बीच मुख्यमंत्री माणिक साहा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा के कृत्य "पूरी तरह से अस्वीकार्य" हैं.
साहा ने फेसबुक पर लिखा, "मैं आशाबारी में बदमाशों के एक समूह द्वारा हमारे बहादुर बीएसएफ कर्मियों पर किए गए क्रूर हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ. हमारे सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा के ऐसे कृत्य पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं और स्पष्ट निंदा के पात्र हैं."
त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी ने भी बीएसएफ कर्मियों पर हुए बर्बर हमले की निंदा की. उन्होंने कहा, "बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करने वाले सिपाहीजाला जिले में तस्करी कोई नई बात नहीं है. अवैध कारोबार में शामिल लोगों को हर कोई जानता है."
सीपीएम नेता ने यह भी आरोप लगाया, "तस्करों में से 100 में से 99 या तो सत्ताधारी दल से जुड़े हैं या उसके स्थानीय नेताओं का संरक्षण प्राप्त कर रहे हैं. इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए."

