एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार, राज्यसभा के 31 प्रतिशत सांसदों ने अपने चुनावी हलफनामों में अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है. वहीं, उच्च सदन के 14 प्रतिशत सदस्यों ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है.
अध्ययन में शामिल राज्यसभा के 230 सांसदों में से 72 ने अपने चुनावी हलफनामों में खुद के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है. राज्यसभा में कुल 245 सीटें हैं और वर्तमान में 241 सदस्य हैं. हालांकि, इस विश्लेषण में अक्टूबर में निर्वाचित 11 सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है.
एडीआर के मुताबिक, विश्लेषण में शामिल 37 सांसदों यानी 16 प्रतिशत ने अपने खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं. रिपोर्ट में गंभीर अपराधों की श्रेणी में ऐसे अपराध शामिल हैं, जिनमें अधिकतम पांच साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, जो गैर-जमानती हैं या जिनसे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा है. इस श्रेणी में मारपीट, हत्या, अपहरण, बलात्कार, महिलाओं के खिलाफ अपराध और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत दर्ज मामले भी शामिल हैं. इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आने वाले अपराधों को भी इस श्रेणी में रखा गया है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 111 राज्यसभा सांसदों में से 31 यानी 28 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. कांग्रेस के 29 सांसदों में से 12 यानी 41 प्रतिशत ने भी ऐसे मामले घोषित किए हैं.
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के नौ में से दो यानी 22 प्रतिशत सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. समाजवादी पार्टी के 40 प्रतिशत और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के 25 प्रतिशत सांसदों ने भी ऐसे मामले घोषित किए हैं. तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के चार राज्यसभा सांसदों में से तीन ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं.
राज्यों के आधार पर देखें तो तेलंगाना के 71 प्रतिशत राज्यसभा सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं. दिल्ली में यह आंकड़ा 67 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 53 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश में 45 प्रतिशत और बिहार में 44 प्रतिशत है.
रिपोर्ट के मुताबिक, एक राज्यसभा सांसद ने अपने खिलाफ हत्या का मामला घोषित किया है, जबकि चार सांसदों ने हत्या के प्रयास से जुड़े मामले घोषित किए हैं. चार सांसदों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित मामले भी घोषित किए हैं.
अध्ययन में शामिल 230 राज्यसभा सांसदों में से 32 ने 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है.
भाजपा के 111 सांसदों में से सात यानी छह प्रतिशत इस श्रेणी में आते हैं. वहीं, कांग्रेस के 29 सांसदों में से छह यानी 21 प्रतिशत के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है. वाईएसआर कांग्रेस पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी के 50-50 प्रतिशत सांसद इस श्रेणी में हैं. भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के 67 प्रतिशत सांसदों ने भी 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की है.
राज्यों के आधार पर तेलंगाना के 57 प्रतिशत राज्यसभा सांसदों के पास 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है. इसके बाद आंध्र प्रदेश के 45 प्रतिशत, ओडिशा के 30 प्रतिशत, पंजाब के 29 प्रतिशत और गुजरात के आठ प्रतिशत सांसद इस श्रेणी में आते हैं.
अध्ययन में शामिल 230 सांसदों की कुल घोषित संपत्ति 26,500 करोड़ रुपये से अधिक है. उनकी औसत संपत्ति 115 करोड़ रुपये है. रिपोर्ट के अनुसार, 45 प्रतिशत सांसदों के पास 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक की संपत्ति है.
दिसंबर 2025 में जारी विश्व असमानता रिपोर्ट 2026 के मुताबिक, भारत दुनिया के सबसे अधिक आर्थिक असमानता वाले देशों में शामिल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की सबसे अमीर एक प्रतिशत आबादी के पास कुल संपत्ति का 40 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि सबसे अमीर 10 प्रतिशत लोगों के पास देश की लगभग 65 प्रतिशत संपत्ति है.

