नवी मुंबई में 3,400 एसआईआर फॉर्म की फोटोकॉपी करते भाजपा कार्यकर्ता पकड़ा गया; 5 बीएलओ निलंबित
‘द हिंदू’ ब्यूरो के अनुसार, नवी मुंबई की एक दुकान में गुरुवार (27 अगस्त, 2026) को एक स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता को मतदाताओं के विवरण वाले 3,400 से अधिक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चुनावी फॉर्म की फोटोकॉपी करते हुए पकड़े जाने के बाद पांच बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) को निलंबित कर दिया गया है.
खारघर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 28 अगस्त की सुबह मामला दर्ज किया गया. जिला कलेक्टर किशन जावले के अनुसार, चुनावी पंजीकरण कार्यालय को एक शिकायत मिली थी कि आरोपी सूरज पाटिल एसआईआर फॉर्म की फोटोकॉपी करवा रहा था.
जावले ने कहा, "शिकायत की जांच के लिए चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को भेजा गया था, जहां उन्होंने पाटिल को खारघर के सेक्टर 19 स्थित एक फोटोकॉपी केंद्र में 3,400 गणना फॉर्म की अवैध फोटोकॉपी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा. ईआरओ ने खारघर पुलिस स्टेशन में अपराध दर्ज कराया."
खारघर पुलिस मौके पर पहुंची और कथित भाजपा पदाधिकारी को हिरासत में ले लिया. परिसर से सभी प्रिंटेड गणना फॉर्म जब्त कर पुलिस स्टेशन ले जाए गए.
पुलिस के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने उस व्यक्ति का सामना किया और दावा किया कि वह भाजपा की युवा इकाई का पदाधिकारी है. जब्त किए गए दस्तावेजों में 188 पनवेल विधानसभा क्षेत्र के वास्तविक एसआईआर फॉर्म शामिल थे, जिनमें मतदाताओं की तस्वीरें, व्यक्तिगत विवरण और आधिकारिक बीएलओ के हस्ताक्षर मौजूद थे.
सेना (यूबीटी) कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पाटिल पूछताछ के लिए लाए जाने के तुरंत बाद खारघर पुलिस स्टेशन से भागने में सफल रहा. इस घटना के बाद शिवसेना (यूबीटी) और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई.
विपक्षी नेताओं ने उठाया सवाल
शिवसेना (यूबीटी) के पदाधिकारी बालेश भोजने ने सवाल उठाया कि आम मतदाताओं द्वारा भरे गए एसआईआर फॉर्म निजी व्यक्तियों तक कैसे पहुंचे और आरोप लगाया कि भाजपा युवा इकाई के पदाधिकारी इस घटना से जुड़े थे. हालांकि, पनवेल नगर निगम के महापौर और भाजपा नेता नितिन पाटिल ने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ताओं का इस मामले से कोई संबंध नहीं है.
विपक्षी राकांपा (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि बीएलओ का निलंबन ही काफी नहीं है और आरोप लगाया कि इस घटना ने उस तरीके को उजागर कर दिया है जिससे एसआईआर प्रक्रिया संचालित की जा रही थी.
उन्होंने कहा, "हम कहते आ रहे हैं कि भाजपा अपनी चुनावी जीत सुनिश्चित करने के लिए इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कर रही है और यह घटना हमें सही साबित करती है."
पवार ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस घटना पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था, लेकिन अधिकारियों ने जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग पर डाल दी.

