महाराष्ट्र में पिछले पांच वर्षों में 36,000 से अधिक फर्म बंद हुईं, सरकार ने संसद को बताया

भारत के सबसे अमीर और सबसे अधिक औद्योगीकृत राज्यों में से एक, महाराष्ट्र में पिछले पांच वित्तीय वर्षों में 36,000 से अधिक निजी कंपनियों का परिसमापन, विघटन  या नाम हटाया गया है. यानी, ये सभी बंद हो गई हैं. सरकार द्वारा संसद में दी गई इस जानकारी के बाद विपक्ष ने अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप, व्यापक भ्रष्टाचार और लगातार प्रतिकूल होते व्यावसायिक माहौल को लेकर सरकार की तीखी आलोचना की है.

‘पीटीआई’ के अनुसार, केंद्रीय कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने शिवसेना (यूबीटी) के सांसद राजाभाऊ वाजे द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में लोकसभा में यह जानकारी साझा की. वाजे ने बुधवार को कहा, "पिछले पांच वित्तीय वर्षों में व्यावसायिक सेवाओं की लगभग 14,000 कंपनियां और विनिर्माण क्षेत्र की लगभग 6,500 कंपनियां बंद हो गई हैं."

उन्होंने पत्रकारों से कहा, "ये क्षेत्र काफी अधिक रोजगार पैदा करते हैं और इतनी बड़ी संख्या में कंपनियों का बंद होना चौंकाने वाला है."

महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने बताया कि मौजूदा शासन के तहत राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार राज्य के आर्थिक प्रगति पथ को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं.

उन्होंने उद्यम के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने में राज्य सरकार की विफलता पर भी चिंता व्यक्त की और जोर देकर कहा कि कंपनियों के बंद होने का यह रुझान भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश के उपयोग के दावों का सीधे तौर पर खंडन करता है.

उन्होंने कहा, "महाराष्ट्र में मौजूदा शासन को केवल सत्ता का लालच है और कुछ नहीं. नए व्यवसाय या औद्योगिक इकाइयां कहां आएंगी, इसमें सरकार के बढ़ते हस्तक्षेप से इस क्षेत्र में राज्य के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. व्यापक भ्रष्टाचार और व्यापार क्षेत्र के लिए प्रतिकूल माहौल अब लोकसभा के इस जवाब में झलकता है."

आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वित्तीय वर्षों में महाराष्ट्र में 36,211 निजी कंपनियों का परिसमापन, विघटन हुआ या उनका नाम रजिस्टर से हटा दिया गया.

इनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी व्यावसायिक सेवाओं की रही, जो 14,613 (कुल का लगभग 40 प्रतिशत) थी. इसके बाद विनिर्माण, खनन, उत्खनन और अन्य क्षेत्र 6,582; व्यापार 4,196; तथा सामुदायिक, व्यक्तिगत और सामाजिक सेवाएं 3,361 रहीं.

निर्माण क्षेत्र की कुल 2,356 कंपनियों को भी इसी स्थिति का सामना करना पड़ा, इसके बाद भंडारण और संचार की 1,336; कृषि और संबद्ध गतिविधियां 1,178; रियल एस्टेट और रेंटिंग 1,149; वित्त 1,012; बिजली, गैस और जल कंपनियां 387; और बीमा कंपनियां 41 रहीं.

ज़िलों की बात करें तो मुंबई शहर में सबसे अधिक 12,009 कंपनियां बंद हुईं, इसके बाद पुणे में 6,433 और ठाणे में 4,704 कंपनियां बंद हुईं. बंद होने वाली कंपनियों में नागपुर की 1,478, नासिक की 840, रायगढ़ की 822 और औरंगाबाद की 654 कंपनियां शामिल थीं. इसके अलावा कोल्हापुर में 429, अहमदनगर में 308, सोलापुर में 262, सांगली में 247, जलगांव में 215, सातारा में 196, बांद्रा उपनगर में 172, नांदेड़ में 169, लातूर में 163 और अमरावती में 151 कंपनियां दर्ज की गईं.  'अन्य' श्रेणी में 5,636 कंपनियां शामिल थीं. मुंबई शहर, पुणे और ठाणे तीनों मिलकर महाराष्ट्र के कुल आंकड़ों का 23,146 यानी लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा हैं.

आरएसएस पर तंज

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की उस हालिया टिप्पणी का हवाला देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी युवा नौकरियां नहीं मांग सकते और कुछ को व्यवसाय शुरू करना होगा, सावंत ने कहा कि सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़े इस संदेश के विपरीत हैं.

सावंत ने कहा, "अब, केंद्र सरकार की अपनी स्वीकारोक्ति से पता चलता है कि भागवत जो उपदेश दे रहे हैं, उसे भाजपा नेता बिल्कुल भी लागू नहीं कर रहे हैं." उन्होंने यह दावा भी किया कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने के मामले में महाराष्ट्र कर्नाटक से पीछे छूट रहा है.

वाजे ने इन कंपनियों के बंद होने से प्रभावित हुए श्रमिकों के डेटा की अनुपस्थिति की ओर भी इशारा किया.

उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार के पास बंद हुई कंपनियों की संख्या के आंकड़े तो हैं, लेकिन दुर्भाग्य से उसके पास यह डेटा नहीं है कि इस तरह के बंद होने से कितने श्रमिक प्रभावित हुए." उन्होंने आरोप लगाया कि नासिक जिले में एक स्थानीय कंपनी से निकाले जाने के बाद पिछले महीने एक मजदूर ने आत्महत्या कर ली थी. अपने लिखित उत्तर में केंद्र ने यह भी कहा कि वह निजी कंपनियों का  परिचालन बंद होने से प्रभावित श्रमिकों की जानकारी नहीं रखता है.

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