नीट दोबारा परीक्षा से पहले 37 दिनों में 12 आत्महत्याएं

नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा से पहले 37 दिनों के भीतर कम से कम 12 छात्रों ने आत्महत्या कर ली. ये सभी छात्र 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले थे. 12 मई को पेपर लीक के आरोपों के बाद नीट-यूजी 2026 रद्द कर दी गई थी और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया था.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, राजस्थान के झुंझुनूं जिले के एक 22 वर्षीय दलित छात्र ने परीक्षा देने के बाद अपने पिता से कहा था कि उसका पेपर बहुत अच्छा गया है. लेकिन पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद वह तनाव में आ गया और 18 मई को उसने आत्महत्या कर ली. परिवार ने मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग करते हुए उसकी अस्थियां विसर्जित करने से इनकार कर दिया है.

राजस्थान के सीकर में ही 15 जून को एक अन्य 22 वर्षीय छात्र अपने घर में मृत मिला. पुलिस को एक संक्षिप्त सुसाइड नोट मिला जिसमें लिखा था, "मैं इस दुनिया से जा रहा हूं, मुझे माफ करना."

गोवा में 17 वर्षीय एक छात्र ने 12 मई को आत्महत्या से पहले लिखा कि वह अब प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में शामिल नहीं होना चाहता. परिवार ने उसकी मौत को परीक्षा के दबाव से जोड़ा है.

उत्तराखंड में 24 वर्षीय एक छात्रा 16 जून को अपने घर में मृत पाई गई. उसने अपने पिता के नाम लिखे पत्र में कहा कि उसमें दोबारा नीट परीक्षा देने का साहस नहीं बचा है.

अहमदाबाद में 17 वर्षीय एक छात्र ने 18 जून को आत्महत्या कर ली. परिवार का कहना है कि वह नीट पुनर्परीक्षा की तैयारी कर रहा था और साथ ही फार्मेसी कोर्स के लिए भी आवेदन कर चुका था.

तमिलनाडु के कोयंबटूर में 19 वर्षीय एक छात्रा ने परीक्षा से पहले अपने रिश्तेदारों को संदेश भेजकर री-एग्जाम को लेकर डर और चिंता जताई थी. 17 जून को उसकी मौत हो गई.

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की 18 वर्षीय छात्रा ने अपने माता-पिता के नाम लिखे पत्र में कहा कि अब उसमें दोबारा नीट देने की हिम्मत नहीं बची है. 20 मई को उसने आत्महत्या कर ली. परिवार ने बताया कि उसकी पढ़ाई के लिए कर्ज लिया गया था और परीक्षा रद्द होने के बाद वह बेहद निराश हो गई थी.

इंदौर की 19 वर्षीय छात्रा, जो एक सरकारी डॉक्टर की बेटी थी, 18 जून की रात एक इमारत से गिर गई और अगले दिन उसकी मौत हो गई. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

उत्तर प्रदेश में एक 17 वर्षीय छात्रा, जिसने अपने परिवार से कहा था कि उसकी पहली परीक्षा बहुत अच्छी गई थी, पुनर्परीक्षा की घोषणा के बाद अवसाद में चली गई. बाद में वह मृत पाई गई. वहीं लखीमपुर खीरी के 21 वर्षीय छात्र, जो तीसरी बार नीट दे रहा था, 14 मई को अपने कमरे में मृत मिला.

दिल्ली के आजादपुर की 20 वर्षीय छात्रा ने नीट का तीसरा प्रयास दिया था और उसे भरोसा था कि इस बार वह सफल होगी. परीक्षा रद्द होने के दो दिन बाद उसने आत्महत्या कर ली.

महाराष्ट्र के लातूर में 18 वर्षीय एक छात्रा, जो डॉक्टर बनना चाहती थी, 25 मई को मृत पाई गई. उसके पिता का कहना है कि परीक्षा रद्द होने के बाद वह लगातार तनाव में थी.

इन 12 मामलों में कम से कम पांच छात्रों ने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा. हालांकि हर मामले में आत्महत्या के कारण अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन सभी छात्र 21 जून को होने वाली नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले थे. इन मौतों ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, अनिश्चितता और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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