कनाडा में 40 से अधिक संगठनों और दो सांसदों ने मोहन भागवत का प्रवेश रोकने की मांग की

कनाडा के 40 से अधिक नागरिक समाज, मानवाधिकार, श्रम और धार्मिक संगठनों ने सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी अनंदसांगरी से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को कनाडा में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की मांग की है. इसके साथ ही कनाडा की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद हीदर मैकफर्सन और जेनी क्वान ने भी सरकार से आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने और भागवत के प्रवेश पर रोक लगाने की अपील की है. भागवत के 31 अगस्त से 1 सितंबर तक कनाडा जाने की संभावना है.

‘मकतूब  मीडिया’ के मुताबिक, 40 से अधिक संगठनों ने कनाडाई मंत्रियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर भागवत की प्रस्तावित यात्रा को सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया है. संगठनों ने आरएसएस पर धार्मिक बहुसंख्यकवाद, डराने-धमकाने और विदेशों में रह रहे कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों तथा अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों को कथित तौर पर निशाना बनाए जाने से जुड़े आरोप लगाए हैं. गठबंधन में कनाडियन फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स एंड डेमोक्रेसी इन इंडिया, कनाडियन काउंसिल ऑफ इंडियन मुस्लिम्स, वर्ल्ड सिख ऑर्गनाइजेशन, कनाडियन काउंसिल ऑफ मुस्लिम वुमन, इंडिपेंडेंट ज्यूइश वॉइसेज कनाडा और कई अन्य संगठन शामिल हैं.

संगठनों ने कहा है कि कनाडाई कानूनों के तहत भागवत की प्रवेश पात्रता की जांच की जानी चाहिए. उनका आरोप है कि आरएसएस से जुड़े नेटवर्क का कनाडा में कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक समुदायों को कथित रूप से डराने-धमकाने से संबंध रहा है. ज्ञापन में मुसलमानों, सिखों, ईसाइयों, यहूदियों और दलितों जैसे अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा गया है कि आरएसएस प्रमुख को प्रवेश देने से उनके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.

इसी बीच ‘स्क्रॉल’ के मुताबिक, सांसद हीदर मैकफर्सन और जेनी क्वान ने कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा, आव्रजन और विदेश मामलों के मंत्रियों को पत्र लिखकर भागवत को देश में प्रवेश के लिए अयोग्य घोषित करने की मांग की है. दोनों सांसदों ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की भी मांग की. उन्होंने भागवत के खिलाफ कथित घृणा भाषण, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के समर्थन, भारत और कनाडा में आलोचकों को निशाना बनाने तथा आपराधिक और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से कथित संबंधों का आरोप लगाया.

दोनों सांसदों ने कनाडा में आरएसएस के प्रभाव को लेकर "पर्याप्त सबूत" होने का दावा किया. उन्होंने कहा कि भारत में मुसलमानों, सिखों, दलितों और अन्य अल्पसंख्यकों को कथित तौर पर डराने-धमकाने और हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ा है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों की उस चिंता का भी हवाला दिया जिसमें कनाडा से सिख समुदाय को हिंदुत्ववादी चरमपंथी समूहों से मिलने वाली हिंसक धमकियों से सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया था.

मोहन भागवत कौन हैं?

मोहन भागवत 2009 से आरएसएस के सरसंघचालक हैं. आरएसएस खुद को सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन बताता है, जबकि संगठन के व्यापक संघ परिवार का भारतीय जनता पार्टी के साथ वैचारिक और संगठनात्मक संबंध रहा है. आरएसएस भारत में तीन बार प्रतिबंध का सामना कर चुका है 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद, 1975 में आपातकाल के दौरान और 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद. बाद में सभी प्रतिबंध हटा दिए गए.

मकतूब ने यह भी उल्लेख किया है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही है. अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने अपनी 2025 की रिपोर्ट में भारत के धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी माहौल में आरएसएस जैसे हिंदुत्ववादी संगठनों की भूमिका को लेकर चिंता व्यक्त की थी. आयोग ने भारत के बाहर धार्मिक अल्पसंख्यकों, कार्यकर्ताओं, पत्रकारों और मानवाधिकार रक्षकों को कथित रूप से निशाना बनाए जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया है.

भागवत की कनाडा यात्रा को आरएसएस के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है. प्रस्तावित यात्रा कनाडा में उनकी पहली यात्रा होगी. फिलहाल कनाडा सरकार की ओर से भागवत के प्रवेश या आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है.

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