‘कॉकरोच’ : अगर चुनाव आयोग प्रमुख ने 48 घंटे में इस्तीफा नहीं दिया तो देशव्यापी आंदोलन

भारत के "कॉकरोच" युवा आंदोलन के नेताओं ने गुरुवार को कहा कि यदि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं, तो वे देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे. इस स्व-घोषित आंदोलन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कॉकरोच जनता पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी... हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के बिना पीछे नहीं हटेंगे."

यह चेतावनी ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें कहा गया था कि मतदाता सूचियों में बदलाव को लेकर उनके सहयोगियों (चुनाव आयुक्तों) ने उनसे सवाल पूछे थे.

विपक्षी दलों ने भी कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए मतदाता सूचियों में हेरफेर की गई है.  बुधवार को 'इंडियन एक्सप्रेस' समाचार पत्र ने बताया कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने 10 महीनों में कम से कम 14 बार सवाल उठाए या चिंता व्यक्त की थी - इनमें से अधिकतर मामले पिछले साल शुरू हुई मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया से जुड़े थे.

‘रॉयटर्स’ में शिल्पा जामखंडीकर की खबर है कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट ने राजनीतिक हंगामा खड़ा कर दिया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर नए सिरे से हमला बोला, जिस पर वे पहले से ही पक्षपात का आरोप लगाते रहे हैं. हालांकि, आयोग ने इन दावों को खारिज किया है.

गुरुवार को मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी, उन्हें पद से हटाने और उनके कार्यकाल में लिए गए सभी फैसलों तथा मतदाता-सूची के बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग को लेकर शुक्रवार को पूरे भारत में सभी राज्य चुनाव कार्यालयों पर विरोध मार्च निकालने की घोषणा की. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को इस मुद्दे पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह "वोट चोरी" के मुख्य साजिशकर्ताओं में से हैं और वे मुख्य चुनाव आयुक्त का बचाव कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए "उनकी जांच की जाएगी."  उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए. कांग्रेस नेता ने कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह "देशद्रोही" हैं क्योंकि उन्होंने देश के लोकतंत्र में वोट को नष्ट कर दिया है. राहुल गांधी ने कुछ वीडियो चलाए और लोगों से पीएम मोदी और अमित शाह के बोलने के लहजे को सुनने के लिए कहा.

उन्होंने आगे कहा, "वीडियो में शाह को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि भाजपा 30 साल तक सत्ता में रहेगी और प्रधानमंत्री 'अबकी बार 400 पार' का नारा दे रहे हैं. लोकतांत्रिक माहौल में काम करने वाला कोई भी राजनीतिक नेता ऐसे बयान नहीं दे सकता."

विपक्षी दलों ने हाल के वर्षों में चुनाव आयोग के कामकाज की आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि बिना किसी चेतावनी के लाखों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए और भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए बिना सत्यापन के नए मतदाताओं को जोड़ा गया.

दूसरी ओर भारत निर्वाचन आयोग ने कहा है कि चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद किसी भी संस्थान के लिए सामान्य बात है और उसकी सभी कार्रवाई कानूनी रूप से सही थी.

दिलचस्प यह है कि भाजपा ने चुनाव आयोग का बचाव किया है और कहा है कि विपक्षी दलों ने एक दुष्प्रचार अभियान शुरू किया है, क्योंकि वे लगातार चुनाव हार रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "न तो भारत का निर्वाचन आयोग और न ही भारत में कोई संवैधानिक संस्था तानाशाही शासन के अधीन है... वे लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहे हैं."

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