लॉन्च के दो महीने बाद भी वीबी-ग्राम जी के तहत 57 लाख सक्रिय श्रमिकों को ई-केवाईसी का इंतज़ार : रिपोर्ट
‘द हिंदू’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का स्थान लेने वाली नई ग्रामीण रोजगार योजना ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-ग्राम जी) के लॉन्च के दो महीने बाद भी लगभग 57 लाख सक्रिय श्रमिक ई-केवाईसी सत्यापन का इंतजार कर रहे हैं.
9 अगस्त, 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में वीबी-ग्राम जी योजना के तहत केवल 7.67 करोड़ मानव-दिवस सृजित किए गए, जो पिछले साल इसी महीने में मनरेगा के तहत सृजित 15.33 करोड़ मानव-दिवस की तुलना में 49.94% कम थे. मानव-दिवस माप की एक इकाई है, जो एक कार्य दिवस में एक व्यक्ति द्वारा किए गए कार्य की मात्रा पर आधारित होती है.
सरकार ने ऐसे कुछ मामलों में छूट दी है जहां जॉब कार्ड का ई-केवाईसी सत्यापन नहीं हुआ है. लेकिन साथ ही, उसने वीबी-ग्राम जी के तहत काम पाने के लिए ई-केवाईसी सत्यापन को एक अनिवार्य शर्त भी बना दिया है.
'नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इंफॉर्मेशन' (एनसीपीआरआई) के चक्रधर बुद्ध द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन से खुलासा हुआ कि 30 जनवरी को हुई एक बैठक में मंत्रालय ने राज्यों से नई वीबी-ग्राम जी प्रणाली में परिवर्तन के तहत एक सप्ताह के भीतर सभी शेष सक्रिय श्रमिकों का ई-केवाईसी सत्यापन पूरा करने को कहा था.
हालांकि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि रोजगार तक निर्बाध पहुंच और मजदूरी के समय पर भुगतान को सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित जॉब कार्ड नए 'ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड' जारी होने तक मान्य रहेंगे, लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि नई योजना के लॉन्च होने के दो महीने बाद पंजीकृत श्रमिकों की दर 71% रही. जबकि सक्रिय श्रमिकों—जिन्होंने पिछले तीन वर्षों में कम से कम एक बार काम लिया है—की ई-केवाईसी सत्यापन दर 94.88% है. हालांकि, रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि "यह अब भी 57 लाख श्रमिकों को असत्यापित छोड़ देता है."

