बांधवगढ़-अचनकमार बाघ गलियारे से केवल 6 किमी दूर कोयला खदान को मंजूरी, तीन माह में चौथी 

मध्य प्रदेश के बांधवगढ़-अचनकमार बाघ गलियारे (टाइगर कॉरिडोर) के निकट जुलाई से अब तक चार कोयला खनन परियोजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल चुकी है. नवीनतम मंजूरी उमरिया जिले में स्थित 'वेस्ट ऑफ शहडोल (साउथ) अंडरग्राउंड कोल माइन' को दी गई है, जो इस गलियारे से महज 6 किलोमीटर दूर है. जेके सीमेंट लिमिटेड द्वारा संचालित यह परियोजना 1,400 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली है, जिसमें 960 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है.

‘पीटीआई-टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति ने 8-9 सितंबर की बैठक में इस परियोजना की सिफारिश की. इससे पहले जुलाई में पथोरा ईस्ट, मरवाटोला VII और अर्जुन वेस्ट कोल ब्लॉक को मंजूरी दी गई थी, जो कॉरिडोर से क्रमशः 1.5 किमी, 53 मीटर और 3.9 किमी की दूरी पर हैं.

बाघ गलियारे का महत्व और पर्यावरणीय खतरे

जैविक विविधता बनाए रखने में बाघ गलियारे अहम भूमिका निभाते हैं.  ये जानवरों को अंतर-प्रजनन और मुक्त आवाजाही का अवसर देकर उनके आवास का विस्तार करते हैं. बांधवगढ़-अचनकमार गलियारा कान्हा-पेंच और बांधवगढ़-संजय-दुबरी जैसी प्रमुख बाघ आबादी को आपस में जोड़ता है.

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान की 2014 की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि इस क्षेत्र में कोयला खनन के बढ़ते दबाव के कारण गलियारे के पारिस्थितिक संतुलन पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.

यद्यपि 'वेस्ट ऑफ शहडोल' परियोजना में केवल 19 हेक्टेयर वन भूमि सीधे प्रभावित होगी, लेकिन परियोजना की पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट के अनुसार, भूमिगत खनन से सतह की बनावट बदल सकती है, जलस्रोत सूख सकते हैं और वनों के छत्र को क्षति पहुँच सकती है. क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, भालू और धारीदार लकड़बग्घा जैसी वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (1972) की अनुसूची-I में शामिल 29 प्रजातियाँ मौजूद हैं.

इसके बावजूद तीन अन्य खदानों को भी स्वीकृति दे दी गई. इनमें सोहागपुर कोयला क्षेत्र में बजरंग पावर एंड इस्पात द्वारा संचालित 1,000 हेक्टेयर से अधिक की परियोजना, रामा सीमेंट इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित आंशिक ओपन-कास्ट और भूमिगत खदान, जिसमें 1,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है और गंगा खनिज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित भूमिगत खदान शामिल है.

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