राम मंदिर में 70 बार नहीं, बल्कि 105 बार हुई चढ़ावा चोरी; एसआईटी ने सुप्रीम कोर्ट में बताया

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी 70 बार नहीं, बल्कि 105 बार हुई. मंदिर में चढ़ावे के हिसाब-किताब में अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयानों और दान के रिकॉर्ड का विश्लेषण करने के बाद कथित चोरी के 105 अलग-अलग मामलों का पता लगाया है.

रोहित कुमार सिंह की रिपोर्ट के अनुसार, 16 सितंबर को शीर्ष अदालत में सौंपी गई स्टेटस रिपोर्ट में 105 मामलों की संख्या का खुलासा किया गया है. यह विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाली पहली एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट में दर्ज चढ़ावा चोरी की 70 घटनाओं से अधिक है. पहली एसआईटी का गठन उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को किया गया था.

शीर्ष अदालत के निर्देशों के बाद 26 जुलाई को दूसरी एसआईटी का गठन किया गया था, जिसमें लखनऊ जोन के पुलिस महानिरीक्षक किरण एस, अयोध्या रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक सोमेन वर्मा, अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव ग्रोवर और बाराबंकी के अपर एसपी रितेश कुमार सिंह शामिल हैं.

जांचकर्ताओं ने सैकड़ों घंटे के निगरानी वीडियो टेप, डिजिटल लॉगिंग रसीदों और बैंक जमा रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैंक लॉकरों में स्थानांतरित करने से पहले दान की राशि को कैसे गायब (हेराफेरी) किया गया था.

स्टेटस रिपोर्ट में लोगों द्वारा दान की गई कीमती वस्तुओं के रख-रखाव की व्यवस्था का भी विवरण दिया गया, अदालत को इस मामले में हुई गिरफ्तारियों और आरोपियों के खिलाफ एकत्र किए गए सबूतों के बारे में अवगत कराया गया.

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना शामिल थे, ने सोमवार को हुई सुनवाई में एसआईटी द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और जांच पर संतोष व्यक्त किया.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस चरण में याचिकाकर्ताओं को स्टेटस रिपोर्ट सौंपने के अनुरोध को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि वह इस मामले को सत्र न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं ले जाना चाहती और यदि अतिरिक्त जांच की आवश्यकता पाई गई तो वह आगे के आदेश पारित करेगी.

उत्तर प्रदेश सरकार, जिसका प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया, ने पीठ को आश्वासन दिया कि 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी. यह समयसीमा महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मामले में पहली गिरफ्तारी से 90 दिनों की वैधानिक अवधि उस दिन समाप्त हो रही है, जिसके बाद गिरफ्तार आरोपी डिफ़ॉल्ट ज़मानत के पात्र हो सकते हैं.

यह विवाद पहली बार 7 जून को तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी के नेता तेज नारायण 'पवन' पांडेय ने आरोप लगाया कि मंदिर के चढ़ावे से ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ की हेराफेरी की गई. अपनी अंतरिम रिपोर्ट में एसआईटी ने आरोप लगाया कि चढ़ावे का एक हिस्सा मंदिर के निर्दिष्ट बैंक खाते में जमा करने से पहले गायब कर दिया गया था, जिसके बाद 26 जून को दान संभालने और गिनती करने से जुड़े आठ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया.

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