अमेरिका के ‘फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट’ (एफएआरए) के तहत अपने नवीनतम खुलासे में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी जेसन मिलर के नेतृत्व वाली अमेरिकी लॉबी फर्म 'एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी' ने "भारत-अमेरिका संबंधों" पर चर्चा के लिए अपनी "राजनीतिक गतिविधियों" के तहत इस साल मई-जून में भारतीय सरकार और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आयोजित आठ फोन कॉल्स को सूचीबद्ध किया है.
दिव्या ए की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अप्रैल 2025 में (संयोग है कि इस अवधि के दौरान ही भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था और पाकिस्तान के साथ संघर्ष के मोर्चे पर घटनाक्रम तेजी से बदल रहा था) मिलर की फर्म के साथ समझौता किया था, और इस लॉबिंग अनुबंध को इस साल अप्रैल में एक और साल के लिए नवीनीकृत किया गया था. हालांकि, 23 जून को मिलर के "विशेष सरकारी कर्मचारी" के रूप में ट्रंप प्रशासन में शामिल होने के बाद यह अनुबंध समाप्त कर दिया गया.
‘एफएआरए’ के नियमों के अनुसार राजनीतिक गतिविधियों में शामिल "विदेशी संस्थाओं के एजेंटों" को अपने संबंधों, गतिविधियों और वित्तीय मुआवजे का समय-समय पर सार्वजनिक रूप से खुलासा करना आवश्यक होता है.
'एसएचडब्ल्यू पार्टनर्स एलएलसी' के अनुसार, मई में विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा से पहले, भारतीय पक्ष और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों—जिनमें ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट, उप एनएसए माइकल नीधम और आतंकवाद व वित्तीय खुफिया मामलों के अवर सचिव जीन लैंग शामिल थे—के बीच फोन कॉल्स आयोजित की गई थीं.
मई में रुबियो की यात्रा के बाद जून में, भारतीय पक्ष और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर, नीति मामलों के राष्ट्रपति के सहायक वॉकर बैरेट, और व्हाइट हाउस संचार कार्यालय के निदेशक स्टीवन चेउंग के बीच बातचीत हुई.
कंपनी ने अपनी फाइलिंग में 23 और 24 मई को रुबियो के साथ दो "दूतावास कार्यक्रमों" को भी सूचीबद्ध किया है. रुबियो 23 मई से 26 मई तक भारत में थे, जिस दौरान उन्होंने अमेरिकी दूतावास द्वारा आयोजित 'अमेरिका @250' कार्यक्रमों में भाग लिया था. मिलर भी उस समय नई दिल्ली में मौजूद थे.
वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास द्वारा मिलर के साथ किए गए इस अनुबंध के तहत प्रति माह $150,000 (1.5 लाख डॉलर) का भुगतान शामिल था. दस्तावेजों के अनुसार, कार्य के दायरे में "अमेरिकी सरकार, अमेरिकी कांग्रेस, राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, थिंक टैंक और अन्य संबंधित हितधारकों के समक्ष नीतिगत मामलों पर रणनीतिक सलाह, रणनीतिक योजना और सरकार से संबंधों में सहायता" शामिल थी.
ट्रंप के फिर से चुने जाने के बाद, भारतीय दूतावास ने राष्ट्रपति के करीबी हलके के माने जाने वाले लोगों के नेतृत्व वाली दो प्रमुख लॉबिंग फर्मों को काम पर रखा था. दूसरी फर्म 'मरकरी पब्लिक अफेयर्स' थी, जिसके साथ $75,000 (75 हजार डॉलर) के मासिक शुल्क पर अनुबंध किया गया था. ट्रंप की संक्रमणकालीन टीम के संचार निदेशक ब्रायन लान्जा इसके मुख्य समूह में शामिल थे. सुजी वाइल्स, जो अब ट्रंप की चीफ ऑफ स्टाफ हैं, वे भी 2024 के अंत तक इस फर्म के साथ एक पंजीकृत लॉबिस्ट थीं.
अपनी फाइलिंग में, मरकरी ने इस साल जून में भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देने वाले ट्रंप के एक 'एक्स' पोस्ट के प्रसार को अन्य गतिविधियों के साथ सूचीबद्ध किया है.

