मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पताल में छह महीने में कम से कम 80 नवजातों की मौत

मध्य प्रदेश के सिवनी जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में छह महीने के दौरान कम से कम 80 नवजातों की मौत हुई है. इन मौतों के बाद जांच की मांग उठी है. परिजनों ने उचित इलाज नहीं मिलने की शिकायत की है, जबकि स्थानीय भाजपा विधायक दिनेश राय मुनमुन ने रात के समय डॉक्टरों की अनुपलब्धता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है.

विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां जिला और उप-जिला अस्पतालों में नवजात मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से स्थापित की जाती हैं. अस्पताल प्रशासन ने मौतों के लिए समय से पहले जन्म, कम वजन और गंभीर बीमारियों को जिम्मेदार बताया है. विधायक ने कहा कि यदि जांच में लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए.

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. विनोद कुमार नवकर ने बताया कि एसएनसीयू में जिले के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से गंभीर रूप से बीमार नवजातों को रेफर करके लाया जाता है. इनमें कई बच्चे गर्भावस्था के छहवें, सातवें या आठवें महीने में पैदा होते हैं, जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है.

नवकर के अनुसार, पिछले छह महीनों में अस्पताल में 1,188 नवजातों का इलाज किया गया. इनमें 642 बच्चों का जन्म वजन सामान्य से कम था, जबकि 582 बच्चों का वजन काफी कम था. कुछ नवजातों का वजन महज 1,100 ग्राम, 900 ग्राम और यहां तक कि 500 ग्राम था.

अस्पताल अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच लगभग 34 नवजातों की मौत हुई, जबकि जुलाई से सितंबर के दौरान 46 बच्चों की जान गई. नवकर ने दावा किया कि एसएनसीयू की नवजात मृत्यु दर 7.5 प्रतिशत से कम है, जो जबलपुर संभाग के अन्य जिलों की तुलना में कम है. उन्होंने नवजात इकाइयों के लिए 10 प्रतिशत मृत्यु दर को संदर्भ मानक बताया.

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल को संबद्ध मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग से अधिक सहयोग की जरूरत है. अस्पताल ने सहायता मांगी थी, लेकिन आवश्यक ड्यूटी व्यवस्था नहीं की गई.

अस्पताल के दावों के बीच कुछ परिवारों ने आरोप लगाया है कि उनके नवजातों को समय पर और पर्याप्त चिकित्सा सहायता नहीं मिली.

‘द सूत्र’ के मुताबिक, नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) के 2024 के आंकड़ों में मध्य प्रदेश की शिशु मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 35 दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 24 था. राज्य में नवजात मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 26 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 18 था.

राज्य के अन्य जिलों में भी नवजातों की मौत के मामले सामने आए हैं. वर्ष 2025 में छतरपुर जिले में आठ महीने के दौरान 402 नवजातों की मौत की खबरें आई थीं, जिससे मध्य प्रदेश में नवजात देखभाल की स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं.

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