सरकार के कोयला आयात आदेश से अडानी को कैसे हुआ मुनाफा, जबकि पूरे भारत में बिजली की कीमतें बढ़ीं

'स्क्रोल' में श्रीगिरीश जलीहल लिखा है कि सरकार के दस्तावेजों से पता चलता है कि 2022 में केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा अनिवार्य किए गए कोयला आयात से अडानी समूह को भारी मुनाफा हुआ, जबकि बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी हो गई.

अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2022-23 में अपने मुनाफे में लगभग 200 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की. कंपनी के कुल कारोबार का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उसके कोयला आयात कारोबार से आया. कंपनी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि विभिन्न राज्य और केंद्र सरकार के बिजली उत्पादन उपक्रमों को की गई आपूर्ति की मात्रा में असाधारण वृद्धि हुई.

मई 2022 में घरेलू कोयले की कमी का हवाला देते हुए विद्युत मंत्रालय ने देश के सभी ताप विद्युत संयंत्रों को अपनी कोयले की जरूरत का 10 प्रतिशत अनिवार्य रूप से आयात करने का निर्देश दिया. यह आदेश ऐसे समय आया, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं. भारत के 16वें वित्त आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2022 से जनवरी 2023 के बीच अंतरराष्ट्रीय कोयले की कीमतें पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 131 प्रतिशत अधिक थीं.

सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त सरकारी पत्राचार से पता चलता है कि इस आदेश का राज्य सरकारों और निजी बिजली कंपनियों ने विरोध किया था. उत्तर प्रदेश और तेलंगाना ने महंगे आयात से अपने वित्त पर पड़ने वाले बोझ को लेकर चिंता जताई. कई निजी बिजली उत्पादकों ने तकनीकी कारणों से आयात से छूट मांगी. इसके बावजूद मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि आयात लक्ष्य पूरा नहीं करने वाली कंपनियों के घरेलू कोयले के आवंटन में 5 प्रतिशत की कटौती की जा सकती है.

एनटीपीसी के अधिकांश ठेके अडानी को

स्क्रॉल ने दिसंबर 2021 से अप्रैल 2024 के बीच नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) द्वारा जारी कोयला आयात के 31 टेंडरों की जांच की. इन टेंडरों के तहत कुल 3.016 करोड़ टन कोयले का आयात किया जाना था. इनमें से 24 ठेके अडानी एंटरप्राइजेज को मिले, जबकि शेष सात अहमदाबाद स्थित कारोबारी समूह की कंपनी आदि ट्रेडलिंक को दिए गए.

आदि ट्रेडलिंक को लेकर अमेरिकी निवेश फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने आरोप लगाया था कि उसका इस्तेमाल अडानी समूह की कंपनियों से अडानी पावर तक धन पहुंचाने के लिए किया गया. अडानी समूह ने इन आरोपों से इनकार किया था.

एनटीपीसी के ठेकों में आयातकों को अंतरराष्ट्रीय कोयले की कीमत और माल ढुलाई खर्च के ऊपर एक निश्चित लाभ मार्जिन मिलता था. इसका अर्थ था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत बढ़ने पर आयातकों के प्रति खेप मुनाफे में भी वृद्धि होती थी.

स्क्रॉल के अनुसार, 31 में से 24 टेंडरों में अडानी एंटरप्राइजेज सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही. इनमें से छह टेंडरों में आदि ट्रेडलिंक ने दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में अडानी की कीमत से मेल खाते हुए 30 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की. बाकी सात टेंडर भी आदि ट्रेडलिंक को मिले, जिनमें उसने सबसे कम बोली लगाई थी.

इस तरह दोनों कंपनियों को एनटीपीसी के लिए कुल 3.016 करोड़ टन कोयले की आपूर्ति के ठेके मिले.

राज्यों ने जताई महंगे आयात पर चिंता

तेलंगाना सरकार ने मई 2022 में विद्युत मंत्रालय को बताया कि घरेलू और आयातित कोयले की कीमतों में प्रति टन 25,000 रुपये का अंतर था. राज्य के अनुसार, यदि उसकी बिजली कंपनी को 10 प्रतिशत कोयला आयात करने के लिए बाध्य किया गया, तो हर साल लगभग 3,750 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.

भारतीय जनता पार्टी शासित उत्तर प्रदेश ने भी इस आदेश का विरोध किया. राज्य सरकार ने मंत्रालय को बताया कि उसकी कैबिनेट ने कोयला आयात की अनुमति नहीं दी थी. दिल्ली में मंत्रालय की बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे भूमि से घिरे राज्यों को कोयला आयात करने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए.

मध्य प्रदेश सरकार ने मानसून के दौरान आयातित कोयले की ढुलाई और प्रबंधन को कठिन बताया. गुजरात सरकार ने सुझाव दिया कि आयात की जिम्मेदारी कोल इंडिया लिमिटेड को सौंपी जाए, क्योंकि राज्य को टेंडर प्रक्रिया में दिक्कतें आ रही थीं.

निजी बिजली उत्पादकों ने भी छूट मांगी. आधुनिक पावर एंड नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड ने कहा कि उसके संयंत्र के बॉयलर आयातित कोयले के अनुकूल नहीं थे. लैंको अनपरा ने बताया कि उत्तर प्रदेश की बिजली वितरण कंपनी ने महंगी बिजली खरीद की आशंका के कारण आयातित कोयले के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी.

बढ़ी हुई लागत की भरपाई के लिए विद्युत मंत्रालय ने बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत आदेश जारी किया. इसके जरिए बिजली कंपनियों को कोयला आयात की अतिरिक्त लागत उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति दी गई. मंत्रालय ने कोल इंडिया को भी राज्यों और निजी बिजली उत्पादकों की ओर से कोयला आयात करने का निर्देश दिया.

कोल इंडिया ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उसे कोयला आयात का बहुत कम या कोई अनुभव नहीं था. सरकारी पत्राचार से पता चलता है कि कंपनी के अधिकारी आयात को लेकर अनिच्छुक थे और निजी कंपनियों के लिए आयात करने से भी उन्होंने इनकार किया. इसके बावजूद मंत्रालय ने उसे कोयला आयात करने और बाद में राज्यों से लागत वसूलने का निर्देश दिया.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतें

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने 2022 में कोयले की कीमतों को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचने वाला बताया था. ऑस्ट्रेलियाई कोयले की कीमत अप्रैल 2022 में 300 डॉलर प्रति टन से कम थी, जो मई में 400 डॉलर से ऊपर पहुंच गई. सितंबर 2023 में यह 443 डॉलर प्रति टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची.

इससे पहले भारत में कोयला आयात 2020 और 2021 में तेजी से घटा था. फरवरी 2020 में तत्कालीन कोयला मंत्री ने कहा था कि भारत 2023 तक कोयले का आयात बंद कर देगा. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू कोयला उत्पादन में सामान्यतः वृद्धि हुई, लेकिन 2022 से पहले लगातार दो वर्षों में खदानों से बिजली संयंत्रों और उद्योगों तक कोयला पहुंचाने की मात्रा में गिरावट आई.

अक्टूबर 2021 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी में संभावित बिजली संकट को लेकर चिंता जताई थी. केंद्र सरकार ने सार्वजनिक रूप से देश में कोयले की कमी से इनकार किया. हालांकि, स्क्रॉल को मिले आंतरिक पत्राचार के मुताबिक, मंत्रालय को पता था कि जुलाई से सितंबर 2021 के बीच ताप विद्युत संयंत्रों में कोयले का भंडार लगातार घट रहा था और अक्टूबर में स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी.

मंत्रालय ने इसके लिए मानसून के दौरान आपूर्ति और परिवहन में आई बाधाओं तथा आयातित कोयले पर निर्भर कई संयंत्रों के बंद होने को जिम्मेदार बताया.

अडानी के कारोबार और मुनाफे में उछाल

अडानी एंटरप्राइजेज का कोयला आयात कारोबार, जिसे इंटीग्रेटेड रिसोर्सेज मैनेजमेंट कहा जाता है, कंपनी का सबसे बड़ा कारोबार है. वित्त वर्ष 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट में कंपनी ने घरेलू उत्पादन बढ़ने और बिजली कंपनियों को आपूर्ति की मात्रा घटने के कारण कारोबार में मुश्किलों का उल्लेख किया था. अगले वर्ष आयातित कोयले की मात्रा 7.88 करोड़ टन से घटकर 6.34 करोड़ टन रह गई.

वित्त वर्ष 2021-22 में भी कंपनी ने कारोबार की मात्रा में गिरावट बताई, लेकिन कहा कि अंतिम तिमाही में उसे राज्य और केंद्र सरकार की बिजली कंपनियों से नए ऑर्डर मिले. यह वही समय था, जब दिसंबर 2021 में विद्युत मंत्रालय ने कोयला आयात की शुरुआती सलाह जारी की थी.

अगले वित्त वर्ष में मंत्रालय का निर्देश सभी बिजली उत्पादकों के लिए अनिवार्य हो गया. अडानी के कोयला आयात की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में 37 प्रतिशत बढ़ गई. इस कारोबार से कंपनी को 99,486 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो उसके कुल कारोबार का लगभग 72 प्रतिशत था. कर से पहले इस खंड का मुनाफा 3,417 करोड़ रुपये रहा.

जुलाई 2022 में एनटीपीसी के टेंडरों में औसत कीमत 15,932 रुपये प्रति टन थी. उसी महीने कोल इंडिया के टेंडरों में इंडोनेशियाई कंसोर्टियम ने औसतन 14,715 रुपये प्रति टन की कीमत पेश की, जो एनटीपीसी द्वारा अडानी एंटरप्राइजेज को दिए गए ठेकों की औसत कीमत से 1,217 रुपये कम थी. कोल इंडिया ने अंततः अडानी को दिया गया एक ठेका रद्द कर दिया, क्योंकि उसकी बोली इंडोनेशियाई कंसोर्टियम से 2,184 रुपये प्रति टन अधिक थी.

अडानी एंटरप्राइजेज को 2022 में अन्य सरकारी बिजली कंपनियों के कोयला आयात के ठेके भी मिले. राजस्थान की सरकारी बिजली वितरण कंपनी ने अपने संयंत्रों के लिए 5.7 लाख टन कोयला आयात करने का अनुबंध किया था.

स्क्रॉल ने विद्युत मंत्रालय, एनटीपीसी, अडानी समूह और आदि ट्रेडलिंक से सवाल भेजे, लेकिन प्रकाशन के समय तक कोई जवाब नहीं मिला था. समाचार संस्था ने कहा कि जवाब मिलने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

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