जबलपुर बोट हादसा: आखिरी पल तक कलेजे से चिपका रहा मासूम, मां की बांहों में मिला शव; 9 की मौत

मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी बांध पर हुए क्रूज हादसे में 9 लोगों की जान चली गई. कहा जा रहा है कि तेज आंधी और तूफान के कारण अनियंत्रित होकर क्रूज नर्मदा नदी में पलट गया. इस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर तब सामने आई जब रेस्क्यू टीम को एक मां और उसके 3 साल के बेटे का शव मिला; मां ने अपनी लाइफ जैकेट में बच्चे को सीने से बांध रखा था.

‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी बांध में गुरुवार की शाम एक बड़ी त्रासदी में बदल गई. नर्मदा नदी में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित एक क्रूज नौका पलटने से  9 लोगों की मौत हो गई है. यह हादसा न केवल मौसम की बेरुखी का परिणाम था, बल्कि यात्रियों ने प्रशासन और क्रूज ऑपरेटरों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप भी लगाए हैं. .

हादसे के समय क्रूज पर चालक दल सहित लगभग 43 यात्री सवार थे. प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के अनुसार, शाम करीब 6 बजे मौसम ने अचानक करवट ली. देखते ही देखते हवा की गति 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई. तेज तूफानी हवाओं और लहरों के कारण नौका अपना संतुलन खो बैठी और बीच जलाशय में ही पलट गई. .

इस त्रासदी में सबसे चौंकाने वाली बात यात्रियों द्वारा लगाए गए सुरक्षा संबंधी आरोप हैं. जीवित बचे लोगों का दावा है कि ‘यात्रा शुरू होने के समय किसी को भी लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी.’ एक पीड़ित, जूलियस, जिन्होंने इस हादसे में अपनी पत्नी को खो दिया. उन्होंने बताया कि जब नाव डूबने लगी और चीख-पुकार मची, तब कहीं जाकर कर्मचारियों ने लाइफ जैकेट बांटना शुरू किया. .

एक अन्य चश्मदीद सम्राट ने कहा कि मौसम खराब होते देख यात्रियों ने ऑपरेटर से नाव वापस किनारे पर ले जाने का अनुरोध किया था, लेकिन उनकी चेतावनी को अनसुना कर दिया गया. .

हादसे की सूचना मिलते ही एनडीआरएफ, राज्य आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं. गुरुवार रात से शुरू हुआ बचाव अभियान शुक्रवार तक जारी रहा, जिसमें अबतक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं एवं  करीब 15 से 16 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं.  

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई है. राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है. साथ ही, पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं. जांच में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर ध्यान देने की बात कही गई है. पहला, खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद नाव का संचालन क्यों जारी रहा, और दूसरा, लाइफ जैकेट वितरण में देरी क्यों हुई. 

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