रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की बदहाली, 90% स्टेशनों में कमी और कई जगह दूषित पानी: कैग
‘डाउन टू अर्थ’ के मुताबिक, भारतीय रेलवे के गैर-उपनगरीय स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की स्थिति को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं. 12 अगस्त 2026 को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, जांच किए गए करीब 90 फीसदी रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए निर्धारित न्यूनतम जरूरी सुविधाओं में से एक या उससे अधिक की कमी पाई गई. कई स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता भी मानकों के अनुरूप नहीं मिली.
कैग ने 2019-20 से 2023-24 की अवधि का ऑडिट किया और देश के 5,908 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों में यात्री सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा की. इन स्टेशनों पर 7,424 से अधिक यात्री ट्रेनें संचालित होती हैं और करीब 2,924 मिलियन यात्री इनका इस्तेमाल करते हैं.
512 में से 458 स्टेशनों पर सुविधाओं की कमी
कैग ने 512 रेलवे स्टेशनों का निरीक्षण किया. इनमें से 458 यानी 89 फीसदी से अधिक स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक यात्री सुविधाओं में एक या उससे अधिक की कमी मिली. इन सुविधाओं में पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, प्लेटफॉर्म शेल्टर, पंखे, वाटर कूलर और संकेतक शामिल हैं.
सिर्फ 54 स्टेशनों पर निर्धारित मानकों के मुताबिक कोई कमी नहीं मिली. ये स्टेशन 13 रेलवे जोन में फैले हुए थे.
कैग ने फरवरी 2025 के पैसेंजर एमेनिटीज मैनेजमेंट सिस्टम के आंकड़ों का भी विश्लेषण किया. इसके मुताबिक अलग-अलग श्रेणी के स्टेशनों और रेलवे जोन में सुविधाओं की कमी बनी हुई थी. रिपोर्ट ने इसे किसी एक-दो स्टेशनों की समस्या के बजाय रेलवे व्यवस्था में मौजूद "सिस्टमेटिक गैप" बताया.
रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे बोर्ड के निर्देशों के बावजूद कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजनाएं भी तैयार नहीं की गईं. यात्री सुविधाओं के मानक रेलवे बोर्ड ने पहली बार 1952 में तय किए थे, जिन्हें अप्रैल 2018 में संशोधित किया गया था.
रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता पर सवाल
कैग ने रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है. रिपोर्ट के अनुसार, पानी की जांच निर्धारित अंतराल पर नहीं की गई और अवशिष्ट क्लोरीन, बैक्टीरियोलॉजिकल संक्रमण तथा रासायनिक मानकों की जांच में भी कमी पाई गई.
2022-23 में 16 रेलवे जोन के 135 स्टेशनों और 2023-24 में 15 जोन के 139 स्टेशनों पर पानी में अवशिष्ट क्लोरीन की मात्रा निर्धारित 0.2 से 0.5 पार्ट्स प्रति मिलियन की सीमा से बाहर पाई गई. 63 स्टेशनों पर 11 जोन में किए गए आधे से अधिक परीक्षणों में क्लोरीन का स्तर निर्धारित सीमा में नहीं था.
प्लेटफॉर्म पर लगे नलों से लिए गए पानी के नमूनों में भी कई जगह बैक्टीरियोलॉजिकल संक्रमण मिला. 2022-23 में आठ रेलवे जोन के 49 स्टेशनों और 2023-24 में नौ जोन के 56 स्टेशनों पर कुल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, जिसमें ई-कोलाई भी शामिल है, पाए गए.
कैग ने कहा कि पानी में क्लोरीन का स्तर निर्धारित सीमा से बाहर होना और ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया की मौजूदगी यात्रियों की सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है.
स्वच्छता और निगरानी में भी कमियां
रिपोर्ट में शौचालयों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. कई जगह शौचालय काम नहीं कर रहे थे और पे-एंड-यूज शौचालयों में भी सुविधाएं अपर्याप्त थीं. अनधिकृत प्रवेश मार्गों की मौजूदगी का असर स्टेशन की साफ-सफाई और सुरक्षा पर भी पड़ रहा था.
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने रेलवे को प्रत्येक स्टेशन के लिए ऐसी वेबसाइट बनाने का निर्देश दिया था, जहां यात्री सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था और कमियों को दूर करने की कार्ययोजनाओं की जानकारी उपलब्ध हो. लेकिन कैग के मुताबिक मार्च 2024 तक किसी भी रेलवे जोन ने ऐसी वेबसाइट शुरू नहीं की थी.
पैसे की कमी नहीं, खर्च करने में कमी
कैग की रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यात्री सुविधाओं के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका पूरा इस्तेमाल नहीं किया गया. 2019-20 से 2023-24 के बीच गैर-कोविड वर्षों में भी यात्री सुविधाओं के लिए निर्धारित बजट का 36 से 44 फीसदी हिस्सा खर्च नहीं किया गया.
कैग के मुताबिक, बार-बार आश्वासन और पर्याप्त धन उपलब्ध होने के बावजूद बजट का लगातार कम इस्तेमाल यह संकेत देता है कि समस्या सिर्फ पैसे की कमी की नहीं, बल्कि योजना बनाने और उसे लागू करने में भी है.
इस तरह कैग की रिपोर्ट रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं की समस्या को केवल कुछ जगहों की कमी नहीं मानती, बल्कि इसे व्यापक और लगातार बनी हुई व्यवस्था संबंधी समस्या के रूप में सामने रखती है. एक तरफ यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं की कमी है और दूसरी तरफ उपलब्ध बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो रहा है, जबकि कई स्टेशनों पर पीने के पानी की गुणवत्ता भी सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चिंता पैदा कर रही है.

