मणिपुर: हिंसक घटनाएँ और चर्च-मकानों में आगजनी, सुप्रीम कोर्ट ने कहा-“लड़ते-लड़ते थक गए होगे”
मणिपुर के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे. बीते मंगलवार को कुकी आबादी वाले कांगपोकपी जिले के तोकपा नागा गांव में हथियारबंद लोगों ने गोलियां चलाईं, और इसके बाद उन्होंने लगभग दस घरों, एक चर्च और अन्य संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया. ‘द प्रिंट’ में समृद्धि तिवारी याद दिलाती हैं कि कुछ दिन पहले ही एक कुकी समूह ने आरोप लगाया था कि हथियारबंद लोगों ने — जिन्हें उन्होंने नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड (इसाक-मुइवा) से जुड़ा बताया था — कांगपोकपी के ही कैलेनजांग गांव में भी घरों को जला दिया था.
राष्ट्रीय राजमार्गों पर आर्थिक नाकाबंदी की स्थिति
मणिपुर की अन्य खबरों में, कुकी समूहों ने इंफाल और उखरुल के बीच चलने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 202 की अपनी दो सप्ताह पुरानी 'काउंटर-इकोनॉमिक नाकाबंदी' वापस ले ली है. उन्होंने यह फैसला सरकार द्वारा यह आश्वासन दिए जाने के बाद लिया कि नागा और मैतेई समूहों ने कुकी समुदाय को निशाना बनाने वाली सड़क नाकाबंदी खत्म करने का भरोसा दिया है.
हालाँकि, यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) राज्य को दो हिस्सों में बाँटने वाले अधिक रणनीतिक राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को अवरुद्ध करना जारी रखे हुए है. उसने दोनों समुदायों के बीच बंधक संकट के दौरान कुकी समूहों द्वारा नागा ग्रामीणों के अपहरण के विरोध में यह कदम उठाया था. यूएनसी की ज़िद है कि पहले उसकी मांगें पूरी की जाएं, जिसमें 20 से अधिक कुकी उग्रवादी संगठनों के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस समझौते को रद्द करना शामिल है.
इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को कुकी और मैतेई समुदायों से कहा, “आप निश्चित रूप से लड़ते-लड़ते थक गए होंगे. अब शांति बहाल करने और सड़कों व राजमार्गों को सुचारू बनाने के बारे में सोचें." दोनों समुदाय तीन साल से अधिक समय से जातीय हिंसा में उलझे हुए हैं.
पूर्वोत्तर में एक और आर्थिक नाकाबंदी जारी है: ऊपरी असम के धेमाजी में आदिवासी गोलीबारी की घटना के विरोध में अरुणाचल प्रदेश जाने वाली सड़कों को बंद कर रहे हैं. इस हफ्ते की शुरुआत में हुई गोलीबारी में 18 लोग घायल हो गए थे. यह घटना तब हुई जब असम के निवासियों का एक समूह गाँव की सीमा विवाद को सुलझाने के लिए अरुणाचल में दाखिल हुआ — उनका दावा है कि वे शांतिपूर्वक गए थे लेकिन उन पर गोलियां चलाई गईं. संबंधित क्षेत्र उन पाँच विवादित क्षेत्रों (जिसमें 52 गांव शामिल हैं) में से एक है, जहाँ इस तरह के सीमा विवाद बने हुए हैं.

