चुनौतियों के बढ़ने से लगातार आठवें सत्र में लुढ़का रुपया; 96.53/डॉलर
अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में निरंतर वृद्धि और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल जैसी बढ़ती बाहरी चुनौतियों के दबाव में मंगलवार को भारतीय रुपया लगातार छठे दिन ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ. इसके साथ ही रुपया लगातार आठवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ है.
‘रॉयटर्स’ के अनुसार, रुपया डॉलर के मुकाबले 96.5325 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ, जबकि सोमवार को यह 96.3450 के स्तर पर बंद हुआ था. कारोबार के दौरान यह मुद्रा 96.6150 के रिकॉर्ड सर्वकालिक निचले स्तर तक छू गई थी. फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें 6.1% की गिरावट आ चुकी है.
फॉरेक्स एडवाइजरी फर्म 'सीआर फॉरेक्स' के प्रबंध निदेशक अमित पाबारी ने कहा, "बाजार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ दिशा की नहीं, बल्कि विश्वास की है. जब तक वैश्विक तनाव में स्पष्ट कमी नहीं आती और विदेशी निवेश के प्रवाह में स्थिरता नहीं दिखती, तब तक रुपया दबाव में कारोबार करना जारी रख सकता है." उन्होंने आगे कहा, "वैश्विक जोखिम कारकों के कम होने के कोई सार्थक संकेत नहीं मिलने के कारण, अब यह जोड़ी (डॉलर-रुपया) धीरे-धीरे 97 के स्तर की ओर बढ़ती दिख रही है."
अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि मध्य पूर्व में युद्ध के कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन में कमी के चलते भारत का चालू खाता घाटा काफी बढ़ जाएगा. युद्ध की शुरुआत से अब तक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में 50% से अधिक का उछाल आया है, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है.
व्यापार घाटा और महंगाई में बढ़ोतरी
कच्चे तेल के आयात में आए उछाल के कारण अप्रैल में व्यापारिक घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर हो गया, जबकि अप्रैल की थोक मुद्रास्फीति साढ़े तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई, जो ऊर्जा की बढ़ती लागत के सीधे असर को दर्शाती है.
अमेरिका को ईरान के नवीनतम शांति प्रस्ताव में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर शत्रुता समाप्त करना, ईरान के करीबी क्षेत्रों से अमेरिकी सेना की वापसी और युद्ध से हुए विनाश के लिए मुआवजे की मांग शामिल है. ये शर्तें देश के पिछले प्रस्ताव जैसी ही हैं, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह "कचरा" बताते हुए खारिज कर दिया था.
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का दबाव
महंगाई की चिंताओं के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हालिया उछाल स्थानीय मुद्रा (रुपये) के दृष्टिकोण को और जटिल बना रहा है. इस सप्ताह अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड एक साल से अधिक के अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गई, जिससे निवेशक दिसंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को मानकर चल रहे हैं.
इस बीच भारत की सरकारी तेल कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 90 पैसे की बढ़ोतरी की. एक हफ्ते में यह दूसरी बढ़ोतरी है. चार दिन पहले प्रति लीटर 3 रुपये बढ़ाए गए थे.

