ईंधन की कीमतों में उछाल से भारत की मई की थोक मूल्य मुद्रास्फीति बढ़कर 9.68% हुई

मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है. इसके परिणामस्वरूप, मई महीने में भारत की वार्षिक थोक मूल्य मुद्रास्फीति (डब्ल्यूपीआई) बढ़कर 9.68% पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 8.26% थी. वर्ष 2022-23 को नया आधार वर्ष मानकर जारी की गई संशोधित शृंखला के तहत यह पिछले छह महीनों की सबसे तेज वृद्धि है.

‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, मई में थोक ईंधन और बिजली की कीमतों में 30.33% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की कीमतें 61.51% तक बढ़ गईं. इसके अलावा, निर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति 7.48% और थोक खाद्य कीमतों में 3.60% की वृद्धि हुई.

ईंधन उत्पादों का अधिक भार होने के कारण थोक मुद्रास्फीति, मई की खुदरा मुद्रास्फीति (3.93%) की तुलना में काफी अधिक बनी हुई है.

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, इस उछाल का ब्याज दरों पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा. भारतीय रिजर्व बैंक ने जून की बैठक में नीतिगत दरों को स्थिर रखा है और वह ईंधन की कीमतों के 'दूसरे दौर के प्रभाव' पर नजर रख रहा है.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रारंभिक समझौते से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है. रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुसार, इससे जून 2026 के डब्ल्यूपीआई आंकड़ों में राहत मिलने की उम्मीद है.

इसके अतिरिक्त, सरकार ने इस बार नए उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) की भी शुरुआत की है, जिसमें आउटपुट, इनपुट और सात प्रमुख सेवा क्षेत्रों (जैसे बैंकिंग, बीमा और दूरसंचार) को शामिल किया गया है. मई में उत्पादक मूल्य 9.38% बढ़े हैं.

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कार्टूनिस्ट मंजुल | 2016 के आसपास से यह निर्देश आने शुरू हो गए थे कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह का चेहरा कार्टून में नहीं दिखाना है.

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