जून में थोक महंगाई बढ़कर 9.8% हुई, खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी

‘स्क्रोल’ के मुताबिक, भारत में जून महीने में थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई) बढ़कर 9.8% हो गई, जो मई में 9.6% थी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी मुख्य वजह रही.

मंत्रालय के अनुसार, सभी वस्तुओं का थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मई के 109.9 से बढ़कर जून में 110.2 पर पहुंच गया.

जून में खनिज तेल (पेट्रोलियम उत्पाद), खाद्य पदार्थ, बेसिक धातुओं का निर्माण तथा रसायन एवं रासायनिक उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला.

आंकड़ों के मुताबिक, प्राथमिक वस्तुओं में महंगाई दर मई के 4.9% से बढ़कर जून में 7% हो गई. वहीं, विनिर्मित उत्पादों में महंगाई लगातार दूसरे महीने 7.4% पर स्थिर रही. दूसरी ओर, ईंधन और बिजली श्रेणी में महंगाई 30.3% से घटकर 27.4% रह गई.

थोक मूल्य सूचकांक उन वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को मापता है, जो खुदरा बाजार तक पहुंचने से पहले थोक स्तर पर खरीदी और बेची जाती हैं.

जून के दौरान खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई 3.6% से बढ़कर 5.4% हो गई. वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं में महंगाई 9.4% से बढ़कर 11% पहुंच गई. खनिजों में महंगाई भी 4.9% से बढ़कर 9.4% दर्ज की गई.

डब्ल्यूपीआई खाद्य सूचकांक में भी तेजी देखने को मिली. यह मई के 4.4% से बढ़कर जून में 6.1% हो गया. इसकी प्रमुख वजह खाद्य वस्तुओं और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही.

विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च से पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना हुआ है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की आपूर्ति पर असर पड़ा है. भारत अपनी करीब 88% कच्चे तेल और लगभग आधी प्राकृतिक गैस की जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है.

सरकार फिलहाल 2022-23 को थोक मूल्य सूचकांक की आधार वर्ष के रूप में इस्तेमाल कर रही है.

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