मध्य प्रदेश भोजशाला विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने मामले का फैसला होने तक मुस्लिम पक्ष के लिए अस्थायी नमाज स्थल का सुझाव दिया
भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर का एक दृश्य. | फोटो: एएनआई
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर नोटिस जारी किया. हालांकि अदालत ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया.
‘द हिन्दू’ के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने सुझाव दिया कि अंतिम फैसला आने तक विवादित परिसर के पास किसी खुले स्थान पर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज अदा करने की व्यवस्था की जा सकती है. अदालत ने इसे अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सुझाया है.
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को भी निर्देश दिया कि वह अदालत की अनुमति के बिना विवादित ढांचे में कोई संरचनात्मक बदलाव न करे.
एक दिन पहले, 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई के लिए सहमति दी थी, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर माना गया था.
धार जिले में स्थित यह 11वीं सदी का संरक्षित स्मारक लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है. हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन भोजशाला मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है.
अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अंतिम फैसला देगा. तब तक एएसआई को विवादित परिसर में कोई संरचनात्मक परिवर्तन करने की अनुमति नहीं होगी और मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक नमाज स्थल पर विचार किया जाएगा.

