ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा बढ़ाई; जम्मू-कश्मीर, बंगाल और छत्तीसगढ़ से अतिरिक्त कंपनियां बुलाईं

मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है. उनके न्यू मोती बाग कॉलोनी स्थित दिल्ली आवास के बाहर, चुनाव आयोग कार्यालय में और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं. जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से सीआरपीएफ की कंपनियां बुलाई जा रही हैं.

ज्ञानेश कुमार के पास पहले से ही Z+ सुरक्षा कवच है, जो प्रधानमंत्री और उनके निकटतम परिवार को दी जाने वाली विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) के बाद देश में दूसरी सबसे बड़ी सुरक्षा श्रेणी है. अधिकारियों ने कहा कि इस नवीनतम कदम के तहत मौजूदा सुरक्षा श्रेणी को बदलने के बजाय, सुरक्षा स्थिति के आधार पर पहले से ही स्टैंडबाय (तैयार) रखे गए अतिरिक्त कर्मियों को तैनात करना शामिल है.

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के सूत्रों ने कहा कि जो कर्मचारी आमतौर पर स्टैंडबाय पर रहते हैं, उन्हें खतरे के आकलन के आधार पर सक्रिय कर दिया गया है. अधिकारी ने कहा, "अधिकारी के पास पहले से ही Z+ सुरक्षा है. हमारे पास सुरक्षाकर्मी स्टैंडबाय पर रहते हैं, और स्थिति के आधार पर उन्हें तैनात किया जाता है. वर्तमान स्थिति में, स्टैंडबाय पर रखे गए कर्मियों को तैनात किया गया है, जो एक मजबूत सुरक्षा उपाय है."

स्थानीय जिला पुलिस को भी किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए आवास और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास तैनाती बढ़ाने के लिए कहा गया है. दक्षिण-पश्चिम जिला पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, "पूरे परिसर को सुरक्षित कर लिया गया है. किसी भी अनाधिकृत प्रवेश को जांचने के लिए कर्मचारियों को अधिक सतर्क रहने के लिए अलर्ट किया गया है."

ये कड़े इंतजाम ऐसे समय में आए हैं जब एसआईआर को लेकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त के आसपास सुरक्षा में यह बढ़ोतरी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले आगामी विरोध प्रदर्शन से निपटने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली में केंद्रीय बलों की एक बड़ी लामबंदी के साथ हुई है.

हाल के दिनों में किसी विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था के कर्तव्यों के लिए केंद्रीय बलों की यह तैनाती सबसे बड़ी लामबंदी में से एक है. जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ से सीआरपीएफ की कंपनियां बुलाई जा रही हैं.

लवप्रीत कौर के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के बीच दिल्ली में कानून-व्यवस्था के कर्तव्यों के लिए छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल से कम से कम 7,000 सीआरपीएफ कर्मियों को लाया जा रहा है. बल की विशेष दंगा-रोधी इकाई - रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के कर्मियों सहित लगभग 3,000 कर्मियों को छत्तीसगढ़ से जुटाया जा रहा है, जबकि अन्य 4,000 कर्मियों को पश्चिम बंगाल से लाया जा रहा है.

6 अक्टूबर के एक आदेश में पश्चिम बंगाल की कंपनियों को दिल्ली में आगे की तैनाती के लिए "जीरो टाइम" (तत्काल) में कार्यमुक्त करने का निर्देश दिया गया, जबकि छत्तीसगढ़ सेक्टर को अपनी निर्धारित कंपनियों को विशेष ट्रेन से आवाजाही के लिए तैयार रखने के लिए कहा गया.  कंपनियों को तैनाती से पहले दंगा-रोधी उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है.

यह तैनाती एसआईआर अभ्यास को लेकर चुनाव आयोग को निशाना बनाकर किए जा रहे विपक्ष के बार-बार के विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में हुई है. इन विरोध प्रदर्शनों में मध्य दिल्ली में मार्च और सभाएं शामिल हैं, जिसके चलते सरकारी और संवैधानिक संस्थानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

इस बीच दिल्ली पुलिस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर बुधवार (7 अक्टूबर 2026) को मध्य दिल्ली में इंडिया गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के संबंध में कांग्रेस नेताओं—जिनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा शामिल हैं—के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज की हैं. ये नए मामले भीड़ नियंत्रण के लिए तैनात एक पुलिस कांस्टेबल द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद दर्ज किए गए, जिसमें उसने कहा कि बुधवार (7 अक्टूबर 2026) के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने उसे घेर लिया और उसके साथ मारपीट की.

संसद पुलिस में तैनात अंकित कसाना के रूप में पहचाने गए कांस्टेबल ने आरोप लगाया कि जब पुलिस गांधी को हिरासत में लेने के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी, तब पुरुषों और महिलाओं सहित लगभग 30 से 35 प्रदर्शनकारियों के समूह ने उसे घेर लिया. उसने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने उसकी वर्दी फाड़ दी और उस पर हमला कर दिया.

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