20 जुलाई के संसद मार्च से पहले प्रदर्शन स्थल पर खड़ा पत्थरों से भरा ट्रक पुलिस हिरासत में था, लेकिन युवा कांग्रेस कार्यालय कैसे पहुंचा: रिपोर्ट

मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को प्रकाशित 'न्यूज़लॉन्ड्री' की एक रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई के संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर के पास खड़ा पाया गया पत्थरों से भरा ट्रक (डंपर) को दिल्ली पुलिस ने चार दिन पहले जब्त किया था. यह ट्रक प्रदर्शन स्थल पर और बाद में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यालय के बाहर दिखा, तब वह पुलिस हिरासत में ही था.

हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने इन दावों को "झूठा और भ्रामक" बताया है कि ट्रक को जानबूझकर जंतर-मंतर के पास या किसी राजनीतिक पार्टी के कार्यालय के बाहर तैनात किया गया था.

20 जुलाई को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन स्थल के पास खड़ी पत्थरों से भरे एक ट्रक की ओर इशारा किया था और दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा था कि यह पुलिस की सुरक्षा घेराबंदी को पार करके प्रदर्शन स्थल तक कैसे पहुँचा. दीपके ने कहा था, "इसका इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को फंसाने या हिंसा भड़काने के लिए किया जा सकता था." हालाँकि, पुलिस ने उनके सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.

न्यूज़लॉन्ड्री की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ट्रक 25 जुलाई को रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस कार्यालय के बाहर पाया गया था और कथित तौर पर 21 जुलाई से वहीं खड़ा था. प्रदेश अध्यक्ष ने भी अपने कार्यालय के बाहर कई दिनों से खड़े इस ट्रक की ओर ध्यान दिलाया था.

रिपोर्ट के मुताबिक, 16 जुलाई को फिरोज शाह रोड-कस्तूरबा गांधी मार्ग चौराहे पर एक वैन से टक्कर के बाद पत्थरों से भरे इस ट्रक को दिल्ली पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया था. दोनों वाहनों को संसद मार्ग थाने के मालखाने में लाया गया था.

रिपोर्ट में संसद मार्ग थाने के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि 20 जुलाई तक ट्रक थाने के ठीक बाहर खड़ा था. प्रदर्शन स्थल पर इसके खड़े होने का वीडियो वायरल होने के बाद, पुलिस ट्रक को भलस्वा ले गई, उसे खाली कराया, वापस लाया और फिर से उसी जगह खड़ा कर दिया.

हादसे की जांच कर रहे जांच अधिकारी (आईओ) ने एक अलग बयान दिया. उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के कारण ट्रक को शुरू में हटाया गया था और वीडियो वायरल होने के बाद वह मालखाने में ही रहा. हालाँकि, अधिकारी ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि वह युवा कांग्रेस कार्यालय तक कैसे पहुँचा. तीसरा बयान संसद मार्ग थाने के एसएचओ ने दिया, जिन्होंने न्यूज़लॉन्ड्री को बताया कि 19 जुलाई को ही ट्रक खाली करा लिया गया था और वायरल वीडियो "पुराना" था.

दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा, "16 जुलाई को तड़के ट्रक और एक ईको वैन के बीच हुए सड़क हादसे के बाद, जिसमें छह लोग घायल हो गए थे, एफआईआर संख्या 65/2026 के सिलसिले में ट्रक को जब्त किया गया था."

बयान में आगे कहा गया, "जगह की कमी के कारण वाहन को शुरू में सुरक्षा के लिए संसद मार्ग थाने के पास खड़ा किया गया था. 'चलो संसद' मार्च के लिए कानून-व्यवस्था के इंतज़ामों को देखते हुए, मालिक को निर्देश दिए जाने के बाद, इसे 20 जुलाई की तड़के खाली कराकर एक सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया था."

दिल्ली पुलिस ने वाहन को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी साजिश से जोड़ने वाले आरोपों को खारिज कर दिया और नागरिकों से बिना पुष्टि वाली जानकारी न फैलाने की सलाह दी.

यह पूछे जाने पर कि वह "सुरक्षित स्थान" कौन सा था, नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने 'द हिंदू' को बताया कि ट्रक वास्तव में कभी प्रदर्शन स्थल तक पहुँचा ही नहीं था. सटीक स्थान का खुलासा किए बिना उन्होंने कहा कि वह "प्रदर्शन स्थल से दूर" था और अब भी वहीं खड़ा है. उन्होंने कहा कि जब्त किए जाने के बाद से वैन भी "थाने के पास" ही खड़ी है. डीसीपी ने कहा, "उक्त रिपोर्ट में पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए बयान तथ्यात्मक और सत्यापन योग्य हैं. इनमें कोई विरोधाभास नहीं है." जब उनसे पूछा गया कि प्रतिबंधित प्रवेश क्षेत्र में ट्रक क्या कर रहा था, तो उन्होंने कहा कि स्वीकृत वाहन अनुमति (परमिट) के साथ प्रवेश कर सकते हैं.

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