यूपी पुलिस ने कहा, पूर्व मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ और बेटे के खिलाफ गवाहों को धमकाने का कोई सबूत नहीं मिला

उत्तर प्रदेश पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि उन्हें 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के एक गवाह को कथित रूप से डराने-धमकाने के मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा 'टेनी' और उनके बेटे आशीष मिश्रा के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है.

उमर राशिद की रिपोर्ट के अनुसार, पिता-पुत्र की इस जोड़ी के साथ-साथ पूर्व जिला पंचायत सदस्य अमनदीप सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में बलजिंदर सिंह को कथित रूप से धमकाने का मामला दर्ज किया गया था, ताकि उन्हें अपनी गवाही दर्ज कराने से रोका जा सके. बलजिंदर सिंह 2021 के हिंसा मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी हैं, जिसमें आशीष मिश्रा उर्फ 'मोनू' मुख्य आरोपी है.

अपराधिक साजिश, आपराधिक धमकी और गवाह को झूठी गवाही देने के लिए डराने-धमकाने के आरोपों के तहत पिछले साल अक्टूबर में पिता-पुत्र और दो अन्य के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. यह मामला सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों पर लखीमपुर खीरी पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह ने तब देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जब स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर उनकी शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया था.

बलजिंदर सिंह का आरोप था कि उन्हें अगस्त 2023 में दो बार डराया-धमकाया गया था. साल 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में आठ लोगों की मौत हो गई थी—जिसमें चार किसान, एक पत्रकार, भाजपा के दो कार्यकर्ता और उनका ड्राइवर शामिल थे. चार किसानों और पत्रकार की हत्या के मामले में आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी है.

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