अमेरिका के 90 नेताओं का संकल्प: आरएसएस से जुड़ा चंदा नहीं लेंगे

द वायर के मुताबिक़, डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन, दोनों ख़ेमों के नब्बे अमेरिकी राजनेताओं ने सार्वजनिक संकल्प लिया है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ा राजनीतिक चंदा नहीं लेंगे. यह ऐलान 'हिंदूज़ फ़ॉर ह्यूमन राइट्स ऐक्शन' और 'सेक्रेड ऐक्ट्स' ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के विवादित अमेरिका दौरे के आख़िरी दिनों में किया.

'सेक्रेड ऐक्ट' के कार्यकारी निदेशक पुष्कर शर्मा ने कहा, "आज हम क़रीब 100 राजनीतिक नेताओं के एक बहुधार्मिक और बहुनस्लीय गठबंधन का ऐलान कर रहे हैं, जो कह रहे हैं कि अमेरिकी लोकतंत्र को अति-अमीर लोग और उनके चरमपंथी एजेंडे ख़रीद नहीं सकते."

इस 'अहिंसा संकल्प' में तीन वादे हैं — राजनीतिक हिंसा और धमकी को ख़ारिज करना, आरएसएस और उससे जुड़े संगठनों का चंदा न लेना, और ऐसा चंदा लौटा देना या लोकतंत्र-समर्थक संगठनों को दे देना. 'हिंदूज़ फ़ॉर ह्यूमन राइट्स ऐक्शन' की कार्यकारी निदेशक रिया चक्रवर्ती ने इसे "दक्षिण एशियाई और हिंदू अमेरिकी समुदायों को आरएसएस द्वारा ग़लत तरीक़े से पेश करने पर ऐतिहासिक फटकार" बताया.

दस्तख़त करने वालों में आठ राज्यों के संघीय, राज्य और नगर स्तर के जनप्रतिनिधि और उम्मीदवार हैं. सांसद रो खन्ना ने कहा कि आरएसएस से जुड़े एक मागा-समर्थक अरबपति से मिला 6,600 डॉलर का चंदा वे दान कर देंगे. न्यूयॉर्क के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ब्रैड लैंडर ने कहा कि अमेरिकियों को "धार्मिक विभाजन, हिंसा और चरमपंथ को ख़ारिज करना चाहिए, चाहे वह देश के भीतर हो या बाहर." गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक़ लैंडर आयोजन स्थल पर प्रदर्शनकारियों के साथ शामिल हुए, जहाँ उन्हें हूटिंग झेलनी पड़ी. सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा कि लोकतंत्र को कमज़ोर करने वाले दक्षिणपंथी संगठनों को ख़ारिज किया जाना चाहिए, "चाहे वह अमेरिका का अति-दक्षिणपंथी आंदोलन हो या भारत का आरएसएस."

भागवत ने न्यूयॉर्क में खचाखच भरे हॉल को संबोधित किया, पर यूएससीआईआरएफ़ समेत कई संगठनों ने दौरे की इजाज़त न देने की माँग की थी और आयोजन स्थल पर प्रदर्शन भी हुए. आयोग ने आरएसएस पर प्रतिबंध की माँग की है. इसकी उपाध्यक्ष सीसी हील ने कहा कि अमेरिका के पास भारत की जवाबदेही तय करने का मौक़ा है, वरना "धार्मिक आज़ादी और बिगड़ती जाएगी." बयान में फ़्रांस की सिआँस पो पेरिस यूनिवर्सिटी के उस शोध का हवाला भी है जो आरएसएस को अमेरिका के 113 संगठनों से जोड़ता है, जिनमें रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन भी है — उसने 2019 में स्टीव बैनन को सह-अध्यक्ष बनाया था.

इस बीच कनाडा की संस्था 'जस्ट पीस एडवोकेट्स' ने आरएसएस से कथित संबंध रखने वाले 21 संगठनों के ख़िलाफ़ कनाडा रेवेन्यू एजेंसी में शिकायत की है और उनके चैरिटी होने के दावे की जाँच माँगी है. इनमें हिंदू स्वयंसेवक संघ कनाडा, एकल विद्यालय फ़ाउंडेशन ऑफ़ कनाडा, विश्व हिंदू परिषद ऑफ़ ओंटारियो और सेवा कनाडा इंटरनेशनल एड इंक शामिल हैं. शिकायत में उसी सिआँस पो डेटा का इस्तेमाल है, जिसके मुताबिक़ कनाडा में आरएसएस से जुड़े संगठनों के बीच क़रीब 4 करोड़ 60 लाख डॉलर का लेन-देन हुआ और 2 करोड़ 15 लाख डॉलर विदेश में आरएसएस से जुड़े समूहों को भेजे गए.

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