ज्ञानेश कुमार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है; ठाकरे बंधुओं ने वादा किया, ‘मुंबई सड़कों पर उतरेगी’

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.  इस सप्ताह की शुरुआत में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’  द्वारा यह रिपोर्ट किए जाने के बाद से ही वे विवादों के केंद्र में हैं कि देश भर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग द्वारा उठाए गए कदमों पर दो चुनाव आयुक्तों ने बार-बार आपत्ति जताई थी. इस प्रक्रिया के तहत देश भर में लाखों नाम मतदाता सूचियों से हटाए और जोड़े गए हैं.

शनिवार को राज ठाकरे, उनके चचेरे भाई उद्धव ठाकरे और भतीजे आदित्य ठाकरे ने वादा किया कि भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई, मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कुमार को हटाने की मांग करने वाले आंदोलन का पूरी ताकत से समर्थन करेगी. विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के प्रतिनिधि अगले कदमों पर समन्वय बढ़ाने के लिए बुधवार को नई दिल्ली में बैठक भी करेंगे.

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके की उस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो सीजेपी 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी, आदित्य ठाकरे ने ‘एक्स’ पर लिखा: “अगर ज्ञानेश नहीं जाते हैं, तो मुंबई 2 अक्टूबर से ‘वोट चोरी’ के खिलाफ बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरेगी!!”

4 अक्टूबर को राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और   उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) द्वारा एक संयुक्त रैली आयोजित की जाएगी. राज ठाकरे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग सत्ताधारी दल की एक शाखा के रूप में काम कर रहा है.”

उन्होंने कहा, “एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) ने रैली का आह्वान किया है, लेकिन यह आम जनता का विरोध प्रदर्शन है. हम सभी राजनीतिक दलों से इसमें शामिल होने के लिए संपर्क करेंगे. आइए एसआईआर के खिलाफ इस जन मार्च में मिलें. आइए इस देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए एक साथ आएं.” उद्धव ठाकरे ने कहा कि रैली का समय और स्थान जल्द ही घोषित किया जाएगा.

दीपके ने कहा था कि सीजेपी का विरोध प्रदर्शन 2 अक्टूबर को मुंबई से शुरू होगा और बाद में इसे भारत के अन्य शहरों में ले जाया जाएगा.

विपक्ष का मंथन

अन्य राष्ट्रीय विपक्षी दल भी चुनाव आयोग से मुकाबला करने के लिए आपसी तालमेल बढ़ा रहे हैं. ‘इंडिया’ गठबंधन के घटकों की बुधवार को नई दिल्ली में बैठक होने की संभावना है.

‘पीटीआई’ के अनुसार, विपक्षी दल एक-दूसरे के संपर्क में हैं और संयुक्त प्रतिक्रिया पर चर्चा कर रहे हैं. वामपंथी दलों — माकपा, भाकपा और भाकपा-माले-लिबरेशन ने भी कुमार को हटाने और एसआईआर को तुरंत रोकने की मांग की है.

रणनीति पर चर्चा के लिए मंगलवार को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होना तय है. इन घटनाक्रमों ने बंगाल की राजनीतिक विरोधी — ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस और माकपा को भी एक मंच पर ला खड़ा किया है. माकपा महासचिव मैरियन अलेक्जेंडर बेबी ने बैठक का अनुरोध करते हुए ‘इंडिया’ गठबंधन और अन्य विपक्षी नेताओं को पत्र लिखा और बाद में बनर्जी से बात की, जो इस बात पर सहमत हुईं कि स्थिति को देखते हुए समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है.

विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक नए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस पर भी काम कर रहे हैं, जिसे कानूनी विशेषज्ञों द्वारा जांचे जाने के बाद संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है. विपक्ष द्वारा किया जाने वाला यह ऐसा तीसरा प्रयास होगा.

मतदाता सूचियों को लेकर विपक्ष की यह लामबंदी अब सड़कों के प्रदर्शनों में भी बदलने लगी है. जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों से 29 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है. ‘एक्स’ पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों को तोड़ा जा रहा है और दावा किया कि मुस्लिम तथा अन्य धर्मनिरपेक्ष सोच वाले मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं.

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