विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन ने शनिवार को विभिन्न कथित चुनावी अनियमितताओं के साथ-साथ मतदाता सूचियों के विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का एक प्रतीकात्मक "सार्वजनिक महाभियोग" आयोजित किया.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में असद रहमान की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार की अध्यक्षता में हुई इस कार्यवाही के दौरान, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर छह आरोप लगाते हुए "प्रस्ताव" पेश किया. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर "चुनाव चोरी की साजिश रचने" और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के "इशारे पर काम करने" का आरोप लगाया.
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन के आरोपों का विवरण देते हुए, खड़गे ने आरोप लगाया कि उन्होंने एसआईआर अभ्यास के दौरान "13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए", संसद की मंजूरी के बिना "फॉर्म 6 को नए सिरे से लिखा", "ईसीआईनेट के माध्यम से मतदाता सूचियों को अपने कब्जे में ले लिया" और "अन्य दो चुनाव आयुक्तों को दरकिनार कर दिया".
इस मॉक (प्रतीकात्मक) महाभियोग कार्यक्रम में शामिल होने वाले 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव, टीएमसी सांसद सौगत रॉय, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, माकपा सांसद जॉन ब्रिटास, सीपीआई के पी. संतोष कुमार और अन्य विपक्षी नेता एवं सांसद शामिल थे.
नागरिक समाज के कई सदस्यों (जिनमें योगेंद्र यादव और निखिल डे शामिल हैं), छात्र नेताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए गए कुछ पीड़ित लोगों ने भी इस कार्यवाही में भाग लिया. खड़गे ने अपने भाषण में कहा कि "भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के माध्यम से हमारे नागरिकों को दिया गया वोट देने का अधिकार आज गंभीर खतरे में है."
उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों ने सीईसी का महाभियोग चलाने के लिए संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव सौंपे थे, लेकिन उनके नोटिस खारिज कर दिए गए. इस साल अप्रैल में, दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने सीईसी को हटाने के लिए विपक्षी सदस्यों के महाभियोग प्रस्तावों को खारिज कर दिया था.
खड़गे ने कहा, "आज हम जो प्रस्ताव लाए हैं, उसका उद्देश्य एक संवैधानिक संस्था की गरिमा की रक्षा करना है. हमारी सीईसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है. हमारा इरादा यह है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से, संविधान की भावना के अनुरूप काम करे और यह सुनिश्चित करे कि इसमें आम आदमी का विश्वास बना रहे. हमें ऐसी स्थिति को रोकना होगा जहाँ दिल्ली में बैठकर कोई कंप्यूटर का उपयोग करके कमजोर वर्गों, महिलाओं और युवाओं के मताधिकार को मनमाने ढंग से हटा सके."
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया, "मोदी सरकार ने सत्ता में बने रहने के लिए सब कुछ किया है—संसद चोरी, पार्टी चोरी, चुनावी बॉन्ड (इलेक्टोरल बॉन्ड्स) और अब वोट चोरी. "
खड़गे ने दावा किया कि सीईसी कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के कारण ऐसे कदम उठाने में सक्षम हुए, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि यह कानून चुनाव आयुक्तों को किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से स्थायी छूट (इम्युनिटी) प्रदान करता है.
उन्होंने कहा कि 2023 का यह कानून मोदी सरकार द्वारा संसद से 145 विपक्षी सांसदों को निलंबित करने के बाद पारित कराया गया था, जिससे वे इस पर चर्चा में भाग लेने से वंचित हो गए थे. उन्होंने आगे कहा, "यह शर्मनाक है. राष्ट्रहित में काम करने वालों को बाहर रखा गया और कानून पास कर दिया गया. यह कानून सीईसी को ऐसी छूट देता है जो राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास भी नहीं है."
खड़गे ने यह भी कहा कि विपक्ष 'घुसपैठियों' के लिए मतदान के अधिकार की मांग नहीं कर रहा है, जैसा कि भाजपा आरोप लगाती है, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सभी भारतीय नागरिकों के मताधिकार की रक्षा हो. उन्होंने कहा, "यह भाजपा ही है जो 'घुसपैठियों' को बचा रही है, और उल्टा चोर कोतवाल को डांट रहा है." लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूचियों से नाम हटाए जाने को लेकर 2024 के लोकसभा चुनावों को 'अवैध' बताया. उन्होंने दावा किया कि हटाए गए मतदाताओं की संख्या विपक्ष और भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच वोटों के 3% अंतर से कहीं अधिक थी.
दिल्ली में 10, राजाजी मार्ग स्थित खड़गे के आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम का मंच लोकसभा जैसा दिखने के लिए तैयार किया गया था, जिसमें लकड़ी की दीवार वाला बैकड्रॉप और सदन की बैठने की व्यवस्था की तरह ही अर्ध-गोलाकार आकार में सीटें लगाई गई थीं. पहली तीन पंक्तियों में माइक लगाए गए थे. "वोट बचाओ, देश बचाओ" के नारे के तहत रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में विपक्षी दल की एक रैली आयोजित की गई है.

