दोनों चुनाव आयुक्तों की चिंताओं के बीच चुनाव आयोग में नए उप चुनाव आयुक्त नियुक्त, संजय कुमार को समय से पहले मूल काडर में भेजा
‘द हिंदू’ में श्रीपर्णा चक्रवर्ती की रिपोर्ट है कि 2010 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश राजपुरोहित को भारत निर्वाचन आयोग में उप चुनाव आयुक्त (डीईसी) नियुक्त किया गया है. वह संजय कुमार के समय से पहले अपने मूल काडर में वापस लौटने से खाली हुए पद को भरेंगे, जो मतदाता सूची और आईटी प्रभाग के प्रभारी थे.
इस नई नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग में कार्यों का आवंटन कैसा होगा, यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि संजय कुमार अगस्त 2024 से इस साल अगस्त तक उप चुनाव आयुक्त रहे थे और चुनाव आयोग के मतदाता सूची व आईटी प्रभागों के लिए जिम्मेदार थे. उन्होंने देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने वाले चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के आदेश पर हस्ताक्षर भी किए थे.
यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दो चुनाव आयुक्तों, एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर बताया था कि चुनाव आयोग में आईटी विभाग की प्रमुख डॉ. सीमा खन्ना की फाइलों को एक अनुभवी अधिकारी (संजय कुमार) के माध्यम से न भेजा जाना नियमों का उल्लंघन था.
डॉ. खन्ना 2025 में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) से प्रतिनियुक्ति पर चुनाव आयोग में शामिल हुई थीं. वह आयोग के आईटी विभाग का नेतृत्व करती हैं और मतदाता-सूची प्रबंधन प्रणालियों सहित इसके डिजिटल बुनियादी ढांचे की देखरेख करती हैं.
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार, संजय कुमार के अपने मूल काडर में लौटने से पहले, डॉ. खन्ना की फाइलें उन्हीं के माध्यम से भेजी जाती थीं, जब तक कि डॉ. खन्ना को लेवल 15 (जो अपर सचिव के पद के समकक्ष है) में पदोन्नति नहीं मिल गई थी.
चूंकि संजय कुमार संयुक्त सचिव के स्तर (जो लेवल 14 है) के अधिकारी थे, इसलिए वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने एक आंतरिक आदेश जारी किया कि डॉ. खन्ना की फाइलें इसके बाद सीधे चुनाव आयुक्तों के पास जानी चाहिए.
हालाँकि, यह आदेश कभी लागू नहीं किया गया. संजय कुमार के वापस लौटने के बाद डॉ. खन्ना की फाइलें खुद मनीष गर्ग के माध्यम से भेजी जाने लगीं, क्योंकि वे उनके 'लिंक ऑफिसर' थे, जिससे उनकी अनुपस्थिति में उनके विभागों के लिए वे जिम्मेदार थे.
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के आदेश के अनुसार, शनिवार देर रात कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा राजपुरोहित की नियुक्ति को मंजूरी दी गई. राजस्थान काडर के इस अधिकारी को 8 अप्रैल 2030 तक के कार्यकाल के लिए इस पद पर नियुक्त किया गया है.
चुनाव आयोग में इस नए जुड़ाव के साथ, यह देखना बाकी है कि काम में किस तरह का फेरबदल किया जाता है और क्या यह दोनों चुनाव आयुक्तों की चिंताओं को दूर करता है, खासकर अगले साल की शुरुआत में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से ठीक पहले.

