कर्नाटक: मतदाता सूची से नाम हटाने वाले हजारों फॉर्म सार्वजनिक जांच के लिए पोर्टल पर उपलब्ध नहीं

‘द हिंदू’ में ऋषिता खन्ना और पोन वसंत बी.ए. की रिपोर्ट है कि कर्नाटक में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान 8 अक्टूबर 2026 तक प्राप्त फॉर्म 7 आवेदनों में से लगभग 29,000 आवेदनों का विवरण राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) या भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइटों पर सार्वजनिक नहीं किया गया है. ये फॉर्म मुख्य रूप से मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए जमा किए गए हैं.

यह स्थिति तब है जब सीईओ और निर्वाचन आयोग दोनों की ओर से यह कहा गया था कि सार्वजनिक जांच के लिए सभी फॉर्म 7 आवेदनों का विवरण उपलब्ध कराया जाएगा. सीईओ के कार्यालय से 9 अक्टूबर को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया था कि पूर्व-एसआईआर मतदाता सूचियों को फ्रीज करने की तिथि (16 जून 2026) से 8 अक्टूबर के बीच 1,10,654 फॉर्म 7 आवेदन प्राप्त हुए थे.

'द हिंदू' की जांच में सामने आया है कि इस अवधि के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट पर केवल 81,822 फॉर्म 7 आवेदनों का विवरण ही उपलब्ध है. बाकी बचे 28,832 आवेदन, सीईओ के बयान के अनुसार आवेदनों की कुल संख्या के एक-चौथाई से भी अधिक हैं. इन फॉर्मों के विवरण के बिना यह स्पष्ट नहीं है कि इन्हें किस निर्वाचन क्षेत्र में, किसने और किसके खिलाफ दायर किया था.

'द हिंदू' ने इससे पहले बबलेश्वर और भालकी जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में कुछ व्यक्तियों द्वारा कई मतदाताओं के खिलाफ थोक में फॉर्म 7 आवेदन दाखिल किए जाने की रिपोर्ट दी थी. मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके कैबिनेट सहयोगियों के विरोध के बाद, कर्नाटक के सीईओ ने जिला चुनाव कार्यालयों को इस मामले की जांच के बाद कार्रवाई करने का निर्देश दिया था.

24 अगस्त 2026 को जब प्रारूप मतदाता सूची जारी की गई थी, तब सीईओ के बयान में कहा गया था, "फॉर्म-9, 10, 11, 11A और 11B में दावों और आपत्तियों की सूची भी सीईओ कर्नाटक की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी ताकि जनता सूची देख सके और संबंधित ईआरओ के पास आपत्तियां दर्ज करा सके."

प्रक्रिया के अनुसार, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रतिदिन प्राप्त होने वाले फॉर्म 7 आवेदनों को 'फॉर्म 10' (निर्वाचन आयोग का एक अन्य रिपोर्टिंग प्रारूप) में समेकित कर वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए. पोर्टल पर उपलब्ध सभी फॉर्म-10 विवरणों के विश्लेषण से अंतर का खुलासा हुआ. लापता फॉर्मों के अलावा, सीईओ की अपनी प्रेस विज्ञप्तियों में ही फॉर्म 7 आवेदनों पर विरोधाभासी और काफी भिन्न आंकड़े सामने आए हैं.

Previous
Previous

श्रवण गर्ग | राहुल के लोग जेपी को ‘हरामी’ बता रहे हैं और मैं चुप हूँ!

Next
Next

दोनों चुनाव आयुक्तों की चिंताओं के बीच चुनाव आयोग में नए उप चुनाव आयुक्त नियुक्त, संजय कुमार को समय से पहले मूल काडर में भेजा