एनआरआई ग्लोबल हेल्थ अलर्ट: क्या भारत में आपका परिवार "सफेद जहर" का सेवन कर रहा है?

डॉ. नेहल वैद्य, जो बाल रोग विशेषज्ञ हैं, लिखते हैं कि एक अनिवासी भारतीय (एनआरआई) के रूप में, हम अक्सर भारत में अपने माता-पिता और रिश्तेदारों के स्वास्थ्य पर ध्यान देते हैं. हालांकि, हाल ही में गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट और हमारे अपने कच्छ क्षेत्र सहित पूरे राज्य में दूध और मावा में मिलावट के बड़े रैकेटों पर हुई कार्रवाई एक डरावनी सच्चाई बयां करती है. आपके परिवार द्वारा पिया जाने वाला दूध शायद "अमृत" नहीं, बल्कि एक धीमा रासायनिक जहर हो सकता है.

वे ये 12 अनिवार्य प्रश्न और उत्तर अपने भारत स्थित प्रियजनों के साथ साझा करने का आग्रह करती हैं. ये हैं:

1. क्या हम जो दूध पीते हैं वह शुद्ध है? यह असली है या नकली? गुजरात की हालिया घटनाओं के आंकड़े चौंकाने वाले हैं. अहमदाबाद (रामोल-वतवा) में एक फैक्ट्री ताड़ का तेल (पाम ऑयल) मिलाते हुए पकड़ी गई. राजकोट-गोंडल हाईवे पर फॉर्मेलिन और यूरिया मिला हुआ दूध जब्त किया गया. सूरत में ग्लूकोज पाउडर, व्हाइटनर और केमिकल एसेंस से "दूध" बनाया जा रहा था. बनासकांठा में माल्टोडेक्सट्रिन पाउडर घोटाला मिला, और मेहसाणा-विजापुर में सोख्ता कागज (ब्लॉटिंग पेपर) और जानवरों की चर्बी का उपयोग दूध को गाढ़ा करने के लिए किया जा रहा था.

2. क्या यह कच्छ में भी हुआ है? बिल्कुल. "सफेद जहर" के सौदागर यहाँ भी सक्रिय हैं. अंजार-गांधीधाम में केमिकल युक्त दूध जब्त किया गया, और भुज में नकली देसी घी और दूध का रैकेट पकड़ा गया. कच्छ के हाईवे पर कई होटलों में पाउडर और पानी से बना "दूध" पाया गया. रण उत्सव और त्योहारों के दौरान भुज और अंजार में स्टार्च और ब्लोटिंग पेपर से बना नकली मावा भारी मात्रा में पकड़ा गया.

3. यह तो चिंताजनक है! आखिर यह नकली दूध बनता कैसे है? इसके दो तरीके हैं: पहला, थोड़े से असली दूध में नकली चीजें मिला देना. दूसरा, बिना असली दूध की एक भी बूंद के, पूरी तरह रसायनों से दूध तैयार करना.

  • वसा (फैट) बढ़ाने के लिए जानवरों की चर्बी या पाम ऑयल का उपयोग किया जाता है. गाढ़ेपन के लिए सोख्ता कागज, स्टार्च या घटिया आटा मिलाया जाता है.

  • सिंथेटिक दूध बनाने के लिए यूरिया, कास्टिक सोडा, डिटर्जेंट और ग्लूकोज का उपयोग होता है. इसे इस तरह बनाया जाता है कि यह दिखने और महकने में बिल्कुल असली दूध जैसा लगे.

4. यदि कोई इसे डेयरी में जमा करे, तो क्या वह पकड़ा नहीं जाएगा? ज्यादातर छोटे विक्रेता और ग्राम समितियों के पास केवल फैट और एसएनएफ मापने वाली मशीनें होती हैं. जालसाज यूरिया और चीनी को इतने सटीक तरीके से मिलाते हैं कि दूध इन टेस्ट को पास कर लेता है.  इसे पकड़ने के लिए विशेष 'एडल्टरेशन टेस्टिंग किट' की जरूरत होती है, जो छोटी सोसायटियों के पास नहीं होती.

5. क्या बड़ी डेयरियों में नकली दूध पकड़ा जाता है? हाँ, बड़ी डेयरियाँ दूध स्वीकार करने से पहले 'डॉक टेस्ट' करती हैं:

  • मिल्क एनालाइजर (FTIR): एक मिनट में यूरिया, सुक्रोज और माल्टोडेक्सट्रिन का पता लगाता है.

  • रैपिड टेस्ट स्ट्रिप्स: डिटर्जेंट, स्टार्च या हाइड्रोजन पेरोक्साइड होने पर रंग बदल देती हैं.

  • एंटीबायोटिक टेस्ट: यह देखने के लिए कि पशु को ज्यादा दवाएं तो नहीं दी गईं.

6. तो क्या हमें केवल बड़ी डेयरियों से दूध खरीदना चाहिए या खुद की गाय रखनी चाहिए? हाँ, ज्यादातर मामलों में यही सही है.  यदि आपके पास कोई पुराना भरोसेमंद दूधवाला है तो ठीक है, अन्यथा बड़ी और प्रतिष्ठित डेयरियां सुरक्षित हैं.

7. हमारे शरीर पर नकली दूध का क्या प्रभाव पड़ता है? नकली दूध के रसायनों से तुरंत जी मिचलाना, उल्टी और पेट दर्द हो सकता है. लंबे समय में यह लिवर-किडनी फेलियर, हृदय रोग और कैंसर के खतरे को बढ़ाता है. यह बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए बेहद घातक है.

8. एक आम व्यक्ति घर पर नकली दूध की पहचान कैसे कर सकता है? कोई "जादुई" टेस्ट तो नहीं है, लेकिन ये तीन तरीके काम करते हैं:

  • शेक टेस्ट (हिलाकर देखें): एक शीशी में बराबर मात्रा में दूध और पानी मिलाएं और जोर से हिलाएं. यदि साबुन के झाग जैसा गाढ़ा झाग बने, तो इसमें डिटर्जेंट है.

  • आयोडीन टेस्ट: दूध में आयोडीन की 2-3 बूंदें डालें. यदि यह नीला हो जाए, तो इसमें स्टार्च या आटा है.

  • स्वाद और स्पर्श: असली दूध मीठा होता है; नकली कड़वा या साबुन जैसा लगता है. हथेली पर रगड़ने पर नकली दूध साबुन जैसा चिकना महसूस होता है. उबलने पर नकली दूध पीला पड़ जाता है.

9. क्या नकली दूध का उपयोग मावा और मिठाइयों में होता है? हाँ, यही इसका मुख्य उपयोग है. नकली मावा पहचानने के तरीके:

  • हथेली टेस्ट: मावे को हथेली पर रगड़ें. असली मावे से घी की महक आएगी और हाथ चिकना होगा. नकली मावे से केमिकल की गंध आएगी.

  • आयोडीन टेस्ट: पानी में मावा घोलकर आयोडीन डालें; नीला रंग मतलब स्टार्च की मिलावट.

10. नकली मावा कैसे बनता है? इसमें पाम ऑयल, कास्टिक सोडा और डिटर्जेंट के साथ गाढ़ेपन के लिए मैदा या आटा मिलाया जाता है.  दानेदार बनावट के लिए भीगे हुए ब्लॉटिंग पेपर का इस्तेमाल होता है. इसे खराब होने से बचाने के लिए 'फॉर्मेलिन' मिलाया जाता है, जिसका उपयोग शवों को सड़ने से बचाने के लिए किया जाता है. यह कैंसर पैदा करने वाला तत्व है.

11. क्या पाम ऑयल की जगह 'जानवरों की चर्बी' का इस्तेमाल होता है? दुर्भाग्य से, हाँ. शाकाहारियों के लिए इन मिठाइयों का सेवन अनजाने में मांसाहार बन जाता है, जो उनकी धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन है.

12. इन जालसाजों के लिए कानूनी सजा क्या है? एफएसएसएआई एक्ट 2006 के तहत कड़ी कार्रवाई होती है: घटिया (पानी मिलाया हुआ) दूध: 5 लाख तक जुर्माना, गलत ब्रांडिंग: 3 लाख तक जुर्माना और नकली/जहरीला दूध: 1 लाख जुर्माने से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा.

कुलमिलाकर, अपने घर आने वाले दूध पर ये घरेलू टेस्ट जरूर करें.  जैसा कि तारक मेहता के चंपकलाल कहते हैं, "सब सब की संभालो!" (हर कोई अपना ध्यान खुद रखे!)

Previous
Previous

ईरान का साथ छोड़ने के लिए भारत ने जो कीमत चुकाई

Next
Next

सावरकर ने 5 बार ब्रिटिश सरकार से मांगी माफ़ी, गाय को भगवान नहीं मानते थे: सावरकर के प्रपौत्र का कोर्ट में बयान