कायस्थ | कॉकरोच और गिद्ध: कल दिल्ली पहुंच रहे हैं दिपके, आगे क्या होगा?
कॉकरोच जनता पार्टी की पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके तीनों प्रवक्ता, दिल्ली
देश के नौजवान बहुत गुस्से में हैं. जेन जी शब्द जन-जन की जुबान पर चढ़ा हुआ है. सिस्टम की सड़ांध से निकली कॉकरोच जनता पार्टी एक बहुत ही व्यवस्थित और क्रियेटिव सोशल मीडिया कैंपेन के बाद कल जनता के सामने आ रही है. नौजवानों का गुस्सा देखकर 15 साल पुरानी कहानी फिर से याद आ रही है.
महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि से आये अन्ना ने दिल्ली में गन्ना बोया और पूरे देश को अचानक सदाचार का दौरा पड़ा. रामलीला मैदान में किसी भी बड़े मेले को मात करती भीड़ को देखकर आरएसएस के एक नेता ने दावा कर दिया था कि यह सब संघ की वजह से संभव हो रहा है. तब सिविल सोसाइटी के कई लोगों ने इस बात की खिल्ली ये कहते हुए उड़ाई थी कि आज़ादी की लड़ाई से लेकर हर जगह जहां कोई भूमिका नहीं होती, वहां आरएसएस वाले अपना दावा ठोकने पहुंच जाते हैं.
कई साल बाद जब तथाकथित भ्रष्ट्राचार विरोधी आंदोलन की कलई खुलनी शुरू हुई और संघ के लाड़ले अजित डोभाल के विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन की भूमिका का पता चला तब समझ में आया कि देश के साथ कितना बड़ा धोखा हुआ है. आगे बढ़ने से पहले स्पष्ट कर देना जरूरी है कि फिलहाल मैं कॉकरोच जनता पार्टी को कोई षडयंत्र नहीं मान रहा हूं लेकिन ये पूरा प्रकरण इस संगठन की हर गतिविधि को सतर्क होकर देखने की मांग करता है.
इसमें कोई शक नहीं है कि कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया कैंपेन देश के नौजवानों की नाराजगी को अभिव्यक्ति दी है. इसके मुद्दे बहुत सही हैं और कैंपेन की तैयारी बहुत पुख्ता लग रही है लेकिन यह बात समझ से परे है कि जब केंद्र सरकार कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया एकाउंट तक ब्लॉक करवा सकती है तो फिर इसके प्रमुख अभिजीत दिपके प्रोटेस्ट के लिए अमेरिका के बॉस्टन शहर से दिल्ली क्यों आ रहे हैं?
केंद्र और बीजेपी शासित तमाम राज्य सरकारें प्रोटेस्ट करने वालों को लेकर बहुत सख्त रही है. विरोध की हर आवाज़ को कुचलने के लिए तमाम कानूनी और गैर-कानूनी हथकंडे अपनाये जा रहे हैं. नोएडा में मजदूरों की वेतन वृद्धि की मांग का समर्थन करने वालों का हाल हम देख चुके हैं. जन-बुद्धिजीवी सत्यम वर्मा एक तरह से गायब करवाये जा चुके हैं. बिना वैध कारण बताये कई और नौजवानों को पकड़ा जा चुका है.
ऐसे में युवाओं की भावनाओं की आवाज़ बन चुकी कॉकरोच जनता पार्टी को सरकार प्रदर्शन करने की अनुमति क्यों देगी? पार्टी ने अपील की है कि अभिजीत दिपके जब कल भारत पहुंचे तो समर्थक उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट आयें. क्या भारतीय कॉकरोच पार्टी को पहले से पता है कि सरकार उन्हें माहौल बनाने की इजाज़त देगी?
अभिजीत दिपके महाराष्ट्र के औरंगाबाद उर्फ सांभाजी नगर के रहने वाले हैं. वे राजनीति शास्त्र के छात्र रह चुके हैं और उनका पेशा भी पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रेटिजिस्ट की रही है. बतौर प्रोफेशनल दिपके आम आदमी पार्टी को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. तो क्या ये भी माना जा सकता है कि तेजी से अपनी साख खो रहे अरविंद केजरीवाल दिपके के ज़रिये 2011 जैसी कोई कहानी दोहराने का खेल रच रहे हैं?
कॉकरोच जनता पार्टी अब तक एक चेहरा विहीन सोशल मीडिया कैंपेन था लेकिन इसके पीछे की तैयारी को देखते हुए ऐसा नहीं लगता है कि यह सिर्फ सिस्टम के प्रति नौजवानों के गुस्से की अभिव्यक्ति है. कहीं ये आंदोलन किसी राजनीतिक गिद्ध दृष्टि की उपज तो नहीं है?
नरेंद्र मोदी पिछले बारह साल में विपक्ष पर जिस तरह से हमलावर रहे हैं, उसकी कोई और मिसाल ढूंढ पाना मुश्किल है. सरकार समर्थक मीडिया भी सवाल विपक्ष से पूछता है और प्रधानमंत्री के प्रेस कांफ्रेंस ना करने को मास्टर स्ट्रोक बताता है. विपक्ष पर हमला केवल शाब्दिक नहीं हैं बल्कि उसे हमेशा के लिए मिटा देने के लिए हर तरह के जोड़ जतन किये जा रहे हैं.
बीजेपी का मॉडल बहुत सीधा है. पहले ईडी-सीबीआई से विपक्ष को डराना और उसके बाद पूरी तरह खरीद लेना. मध्य-प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद बंगाल में भी ये मॉडल कामयाब हो चुका है. लगभग सारी क्षेत्रीय पार्टियां तोड़कर मिटाई जा चुकी हैं. राहुल गाँधी और अखिलेश यादव को छोड़कर पूरे विपक्ष में अब एक भी ऐसा नेता नहीं बचा है, जिसकी अपनी आवाज़ हो और वो सरकार की आँखों में आँखें डालकर बात कर सके.
संगठन की ताकत के बल पर विपक्ष किसी भी तरह सरकार को चुनौती देने की हालत में नहीं है. दूसरी तरफ महंगाई, पेपर लीक और भ्रष्ट्राचार की वजह से जनता का गुस्सा बढ़ता जा रहा है. तो क्या कॉकरोच जनता पार्टी देश के आम नागरिकों के गुस्से को दूसरी तरफ डायवर्ट कर देने की कोई रणनीति है, ताकि विपक्ष को इसका कोई राजनीतिक लाभ ना मिले?
न्यू इंडिया में अब अनैतिक कुछ भी नहीं है. बंगाल में चुनावी लाभ के लिए महिला आरक्षण का शिगूफा और संसद की विशेष सत्र जैसे तमाशे ये देश देखता आया है. ऐसे में कुछ भी संभव है. हालांकि मैं भारतीय कॉकरोच जनता पार्टी के बारे में निर्णायक रूप से कोई राय नहीं बना पाया हूं और ये मानता हूं कि इसकी गतिविधियों को थोड़ा ठहरकर देखने की जरूरत है. आप क्या सोचते हैं?

