श्रवण गर्ग | यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का महाभियोग नहीं था, यह सरकार का, मोदी का और अमित शाह का महाभियोग था

‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक महाभियोग की कार्यवाही, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और देश में बढ़ते राजनीतिक असंतोष पर चर्चा की.

श्रवण गर्ग के अनुसार, विपक्ष का आंदोलन अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश में व्यापक असंतोष दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि जब बड़ी संख्या में नागरिक स्वयं को विपक्ष की भूमिका में देखने लगें, तब विपक्ष के आंदोलन को अलग करके नहीं समझा जा सकता. उनके मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर आयोजित प्रतीकात्मक संसद में विपक्षी दलों के नेताओं के साथ नागरिक समाज के प्रतिनिधि और अन्य लोग भी शामिल हुए. इस कार्यवाही की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की.

गर्ग ने इस आयोजन को केवल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और चुनाव प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों का प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं. इस संदर्भ में राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि इन मतदाताओं को अवैध माना जा रहा है, तो 2024 के लोकसभा चुनाव में उनके वोटों से बनी सरकार की वैधता पर भी सवाल खड़ा होता है. गर्ग के अनुसार, यह तर्क चुनाव आयोग की जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ी बहस को सामने लाता है.

उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार में हुए विधान परिषद चुनावों के नतीजों का भी उल्लेख किया. गर्ग ने कहा कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्षी दलों का प्रदर्शन सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए चुनौती का संकेत है. उनके मुताबिक, इन नतीजों से शिक्षित मतदाताओं के बीच सरकार के प्रति असंतोष के संकेत भी मिलते हैं.

बातचीत में गर्ग ने ब्राजील, सर्बिया, इजराइल और अमेरिका सहित कई देशों के राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दक्षिणपंथी नेतृत्व को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भीतर भी बेचैनी के संकेत होने का दावा किया.

गर्ग का मानना है कि प्रतीकात्मक संसद और उसके बाद रामलीला मैदान में होने वाला प्रदर्शन देश में राजनीतिक विरोध के एक नए दौर का संकेत हो सकते हैं. उन्होंने नागरिकों से इन घटनाक्रमों और नेताओं के बयानों पर ध्यान देने की अपील की.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

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