पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की एक आठ महीने की गर्भवती समर्थक ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं द्वारा मारपीट किए जाने के दो दिन बाद शुक्रवार को मृत बच्चे को जन्म दिया. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को महिला के साथ मारपीट की गई थी.
टीएमसी समर्थक और निजी शिक्षक देबजीत बर्मन रात में अपने घर लौट रहे थे, तभी कथित तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं के एक समूह ने उन पर हमला कर दिया. उनकी गर्भवती पत्नी प्रिया पाल उन्हें बचाने के लिए बीच में आईं, तो हमलावरों ने उनके साथ भी मारपीट की.
घटना के बाद दंपती को उपमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया. बर्मन के मुताबिक, शुक्रवार को प्रिया पाल ने मृत बच्चे को जन्म दिया. डॉक्टरों ने पहले अनुमान लगाया था कि उनकी डिलीवरी दिसंबर में होगी.
‘द टेलीग्राफ’ के अनुसार, बर्मन ने साहेबगंज पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें 10 लोगों के नाम शामिल हैं. पुलिस ने इस मामले में अब तक भाजपा से कथित रूप से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया है.
हालांकि, भाजपा नेताओं ने आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने दावा किया कि महिला के साथ मारपीट करने वाले लोग पार्टी से जुड़े नहीं थे और यह मामला किसी अन्य विवाद से संबंधित था.
यह घटना कूचबिहार के दिनहाटा स्थित सालमारा गांव में एक साल से अधिक समय पहले हुई ऐसी ही घटना की याद दिलाती है. उस समय भाजपा ने आरोप लगाया था कि टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उसकी आठ महीने की गर्भवती समर्थक के साथ मारपीट की थी.
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भाजपा ने दावा किया था कि उसके कई कार्यकर्ता घायल हुए थे. इनमें गर्भवती महिला भी शामिल थी. पार्टी का आरोप था कि उनके घरों पर हमला किया गया था.
वहीं, टीएमसी ने उस घटना के लिए भाजपा की आंतरिक गुटबाजी को जिम्मेदार ठहराया था. उस समय टीएमसी नेता दीपक भट्टाचार्य ने कहा था कि उनकी पार्टी हिंसा में विश्वास नहीं करती. उनके मुताबिक, स्थानीय लोगों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की कोशिशों के विरोध में भाजपा पदाधिकारियों पर हमला किया था.
भाजपा ने तब आरोप लगाया था कि पार्टी का समर्थन करने के कारण गर्भवती महिला के पेट में लात मारी गई थी. पार्टी ने सोशल मीडिया पर लिखा था, “उसका एकमात्र ‘अपराध’ भाजपा में विश्वास करना था.”

