राकेश कायस्थ | बंद करो राजनीति
नरेंद्र मोदी दुनिया के सबसे 'अ-राजनीतिक' प्रधानमंत्री हैं. चार साल में 3 बार पेपर लीक हो गये. हताशा में 20 बच्चों ने अपनी जान दे दी लेकिन मजाल है मोदीजी इस पर राजनीति करें. उन्होंने इस मामले पर मुँह तक नहीं खोला.
विपक्षी नीच है, बच्चों के मर जाने पर राजनीति कर रहे हैं. मरने वाले बच्चों के परिवार वाले भी नीच हैं. जो चला गया वो लौटकर थोड़े ना आएगा, जो बच्चा रह गया है, उसे मोदी जी की पुस्तिका एग्जॉम वारियर्स पढ़ाते और मन की बात सुनाते, इस मामले में राजनीति करने की क्या जरूरत थी?
जब बच्चों की आत्महत्या की खबर आनी शुरू हुई तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक श्रद्धांजलि वाला एक ट्वीट लिखा और फिर ये सोचकर डिलीट कर दिया कि ये तो राजनीति करना हो जाएगा. विपक्षी शोक जता रहे हैं, अगर प्रधान जी भी शोक जता दें तो फिर भी वो उन्हीं की कतार में शामिल हो जाएंगे. छि! वैसे भी जब प्रधानमंत्री जी राजनीति नहीं कर रहे हैं तो फिर किसी और राजनीति करने क्या हक है.
दिल्ली पुलिस ने कील लगे डंडे चलाये, पैलेट गन से नौजवानों के पेट, पीठ और चेहरों पर वैसे ही निशान बना दिये जैसे सुरक्षा बल कश्मीर में बनाते हैं. सड़क का कोना पकड़कर चुपचाप जा रहे बच्चों के मोबाइल तोड़े. भीड़ के कोने में खड़ी लड़कियों को ढूंढकर थप्पड़ मारे और कपड़े फाड़े. अर्नब गोस्वामी ने चीख-चीखकर दुनिया को बताया कि कोक्रोच पार्टी के साथ मिलकर विपक्षी गुंडागर्दी कर रहे हैं. लेकिन धन्य हो गृह मंत्री अमित शाह, उन्होंने इस पर तनिक भी राजनीति नहीं की. बयान तक नहीं दिया.
टुच्चे विपक्षी सांसद लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से इस मामले पर चर्चा की मांग करने लगे. फिर वही राजनीति! स्पीकर साहब संस्कारों वाले हैं, मर्यादा का बहुत ख्याल रखते हैं, इसलिए उन्होंने चर्चा की अनुमति ना देकर संसद में ओछी राजनीति होने से बचा लिया.
ढीठ विपक्षी प्रधानमंत्री के घर तक पहुंच गये और धरना देने लगे. अब तक तो राजनीति हो रही थी, अब प्रधानमंत्री की जान पर भी बन आई. कमबख्त विपक्षियों को ऐसा धरना ही देना था तो मोदीजी के नये घर में शिफ्ट होने का इंतज़ार कर लेते.
सेंट्रल विस्टा में प्रधानमंत्री जी ने अपना जो महल बनवाया है, उसमें सुरंग की व्यवस्था इन्हीं दिनों के लिए ही तो है लेकिन विपक्षी जानबूझकर पहले ही आ धमके. गृह मंत्री अब प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं, इसलिए गोदी मीडिया भी चिंतित है. राजनीति भी करोगे और प्रधानमंत्री को डराओगे भी?
सुनने में आया है कि ओछी राजनीति बंद करवाने के लिए गृह मंत्री ने इलेक्शन कमिश्नर, ईडी-सीबीआई प्रमुखों के साथ बैडमिंटन खेलने वाले देश के सबसे बड़े हाकिम के साथ मीटिंग की है. सबने भरोसा दिया है कि चाहे जो भी लेकिन इस देश में राजनीति नहीं होने दी जाएगी.
विपक्षी दलों को समझाया जाएगा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र का महापर्व है. ये पर्व धूमधाम से मनाना लेकिन आगे अगर किसी चुनाव में मोदी जी को हराने की राजनीति की तो फिर... कसम एपस्टीन की... समझ रहे हो ना?

