मणिपुर में संदिग्ध उग्रवादी हमले में तीन कुकी नागरिकों की हत्या, चार घायल
मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक और हिंसक घटना सामने आई है. ‘स्क्रोल’ के मुताबिक, कांगपोकपी जिले में इम्फाल-तामेंगलॉन्ग मार्ग के किनारे स्थित एक कुकी गांव पर कथित तौर पर नागा समुदाय से जुड़े एक सशस्त्र समूह ने हमला किया, जिसमें तीन कुकी नागरिकों की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए.
मारे गए लोगों की पहचान 40 वर्षीय टिंगनेइचिन ल्हौवुम, 36 वर्षीय लामतिनथांग ल्हौजेम और 21 वर्षीय होइनेंग ल्हौजेम के रूप में हुई है. जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने घटना की जानकारी दी है.
यह एक सप्ताह के भीतर इम्फाल-तामेंगलॉन्ग मार्ग पर हुई दूसरी बड़ी हिंसक घटना है. इससे पहले गुरुवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने चार नागा नागरिकों पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी.
कुकी-नागा संघर्ष में अब तक 34 मौतें
मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव इस साल फरवरी में बढ़ा था. उखरुल जिले में तांगखुल नागा और कुकी-जो समुदायों के सदस्यों से जुड़ी कथित मारपीट की घटना के बाद दोनों समुदायों के बीच तनाव और हिंसा बढ़ी.
यह घटनाक्रम मई 2023 में शुरू हुए व्यापक जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि में सामने आया है. उस समय मैतेई और कुकी-जो-हमार समुदायों के बीच हिंसा भड़की थी. तब से अब तक कम से कम 260 लोगों की मौत और 59,000 से अधिक लोगों के विस्थापित होने की बात सामने आई है.
फरवरी 2026 में शुरू हुए कुकी-नागा संघर्ष में ताजा हत्याओं के बाद मृतकों की संख्या कम से कम 34 हो गई है. इम्फाल-तामेंगलॉन्ग मार्ग इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है और इसके आसपास के गांवों में कुकी तथा नागा समुदाय के लोग रहते हैं.
नागा विधायकों ने अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग की
ताजा हिंसा के बीच सोमवार को उपमुख्यमंत्री श्री लोसी डिखो समेत नौ नागा विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को पत्र लिखकर मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की.
विधायकों ने उन कुकी-जो नेताओं की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की, जिन पर नागा नागरिकों की हत्या की सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी स्वीकार करने का आरोप लगाया गया है.
यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब इम्फाल-तामेंगलॉन्ग मार्ग पर लगातार हो रही हिंसा ने दोनों समुदायों के बीच अविश्वास और तनाव को और बढ़ा दिया है.
मणिपुर में जनगणना 2027 टली
इसी हिंसक पृष्ठभूमि के बीच केंद्र सरकार ने मणिपुर में जनगणना 2027 की प्रक्रिया को टाल दिया है. मणिपुर सरकार के सोमवार को जारी बयान के अनुसार, यह फैसला केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया.
जनगणना 2027 का पहला चरण, जिसमें मकानों की सूची तैयार की जानी थी, मंगलवार से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलना था. हालांकि राज्य में जनगणना की तैयारियों को विरोध प्रदर्शनों के कारण पहले ही बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था.
केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से इस फैसले पर अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
जनगणना से पहले एनआरसी की मांग
जनगणना टालने के पीछे मणिपुर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को भी एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है. राज्य में नागरिक समाज के कुछ संगठन मांग कर रहे हैं कि जनगणना से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी एनआरसी को अपडेट किया जाए.
इन संगठनों, जिनमें मुख्य रूप से मैतेई, नागा और मैतेई पांगल समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह शामिल हैं, का तर्क है कि 1951 के रिकॉर्ड के आधार पर एनआरसी तैयार करने से कथित रूप से बिना दस्तावेज वाले म्यांमार के प्रवासियों की पहचान की जा सकेगी.
रिपोर्ट के अनुसार, इन समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले 14 नागरिक संगठनों ने भाजपा अध्यक्ष श्री नितिन नबीन और केंद्रीय मंत्रियों सहित कई वरिष्ठ नेताओं से संपर्क कर जनगणना से पहले एनआरसी लागू करने की मांग की है. इन संगठनों में कुकी-जो समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं है.
इन संगठनों का आरोप है कि म्यांमार से आए कुछ प्रवासी मणिपुर के विभिन्न हिस्सों में बस गए हैं और जनगणना के दौरान उन्हें राज्य के निवासी के रूप में दर्ज किया जा सकता है.
मणिपुर में एक तरफ कुकी और नागा समुदायों के बीच हिंसा का नया दौर चिंता बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ जनगणना और एनआरसी को लेकर विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक तनाव को और जटिल बना दिया है. ऐसे में सुरक्षा के साथ-साथ नागरिकता, जनगणना और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली भी केंद्र और राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई है.

