श्रवण गर्ग | शिकंजा ज्ञानेश कुमार पर नहीं, सरकार पर कस रहा है
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस एपिसोड में निधीश त्यागी वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा कर रहे हैं. बातचीत में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद, सरकार की राजनीतिक जिम्मेदारी और विपक्ष के आंदोलन के व्यापक प्रभाव पर चर्चा हुई.
श्रवण गर्ग का कहना है कि मौजूदा दबाव को केवल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई या उन्हें हटाने की मांग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, असली राजनीतिक दबाव सरकार पर है और ज्ञानेश कुमार इस पूरे विवाद में एक प्रतीक मात्र हैं. उन्होंने ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की और उनकी तुलना “मर्सिनरी” से की. यह उनका आरोप और राजनीतिक आकलन है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि बातचीत में नहीं की गई है.
गर्ग ने कहा कि सरकार की ओर से ज्ञानेश कुमार का बचाव किए जाने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक जिम्मेदारी दिखाई देती है. उनका तर्क है कि सत्ता में बैठे शीर्ष नेतृत्व को स्वयं अपना बचाव करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि सरकार के भीतर उनके समर्थक और जिम्मेदार लोग उनकी ओर से राजनीतिक जवाब देते हैं.
इसके विपरीत, गर्ग के अनुसार राहुल गांधी खुद आंदोलन के केंद्र में बने हुए हैं, क्योंकि उनके पीछे हटने की स्थिति में आंदोलन कमजोर पड़ सकता है. उन्होंने ज्ञानेश कुमार के कुछ प्रस्तावित दौरों के रद्द होने का भी उल्लेख किया और इसे व्यापक राजनीतिक परिस्थिति से जोड़कर देखा.
गर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल के विदेश दौरों का हवाला देते हुए अपना अनुमान रखा कि मौजूदा परिस्थितियों में सत्ता के शीर्ष नेतृत्व में भी चिंता हो सकती है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के देश से बाहर जाने पर राजनीतिक परिस्थितियों में अचानक बदलाव की आशंका हो सकती है. यह उनका राजनीतिक अनुमान है, न कि बातचीत में प्रस्तुत कोई पुष्ट तथ्य.
पूरी चर्चा में श्रवण गर्ग ने ज्ञानेश कुमार के बजाय सरकार को मौजूदा राजनीतिक संघर्ष का वास्तविक केंद्र बताया और राहुल गांधी की भूमिका को आंदोलन के नेतृत्व तथा उसके भविष्य से जोड़कर देखा.
पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

