बागी टीएमसी सांसदों के एनसीपीआई ‘नवाचार’ ने लोकसभा अध्यक्ष को सुरक्षा उपाय तैयार करने पर किया मजबूर

तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भेंट.

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी 20 सांसदों की अल्प-ज्ञात पार्टी एनसीपीआई के साथ विलय करने की योजना एक ऐसा "नवाचार" (इनोवेशन) है, जिसका दलबदल विरोधी कानून या जन प्रतिनिधित्व अधिनियम दोनों में ही कोई उल्लेख नहीं है. निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी ने यह जानकारी दी. वहीं अन्य सूत्रों का कहना है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बागी धड़े को मान्यता देने पर कोई भी फैसला करने से पहले अलग हुए सांसदों और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट, दोनों का पक्ष सुनेंगे. इसके अलावा वे केंद्रीय कानून मंत्रालय की राय भी लेंगे, ताकि न्यायालय में यदि उनके फैसले को चुनौती दी जाए तो न्यायिक समीक्षा में वह टिक सके.

‘पीटीआई और टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, स्पीकर कार्यालय ने ममता के नेतृत्व वाले धड़े—जो अब बेहद छोटा रह गया है—को भी अपना रुख स्पष्ट करने के लिए एक ईमेल भेजा है.

लोकसभा के पूर्व महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ पी.डी.टी. आचार्य ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 4 का हवाला देते हुए इस बात को रेखांकित किया कि केवल एक राजनीतिक दल ही दूसरे राजनीतिक दल में विलय कर सकता है, सांसद या विधायक नहीं.

उन्होंने बताया: "यदि किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व किसी दूसरे राजनीतिक दल के साथ विलय करने का निर्णय लेता है, तो उसके विधायकों और सांसदों को उस विलय पर सहमत होना होगा, लेकिन सांसद या विधायक अकेले किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय नहीं कर सकते... यही संवैधानिक प्रावधान है."

बिरला ने 2 घंटे बाद बुलाया, लेकिन अभिषेक से ईडी पूछताछ कर रही थी

इस बीच ‘द हिंदू’ की खबर है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार (15 जून, 2026) को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी सांसदों के समूह को "अपना पक्ष रखने" के लिए आमंत्रित किया था. दरअसल, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने 10 जून को इस बारे में लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अध्यक्ष से आग्रह किया था कि वे लोकसभा में टीएमसी के किसी भी बागी गुट को मान्यता या अलग दर्जा न दें. बनर्जी ने कहा था कि टीएमसी एक "एकल, अविभाज्य राजनीतिक दल" है और इसके विधायी दल को मूल संगठन से अलग नहीं किया जा सकता है, तथा हस्ताक्षरों के आधार पर अलग हुआ कोई भी समूह मान्यता का दावा नहीं कर सकता.

ममता बनर्जी धड़े के अनुसार, अध्यक्ष कार्यालय से बनर्जी को संबोधित यह आमंत्रण दोपहर 2 बजे आया, जिसमें उन्हें सोमवार (15 जून) को शाम 4 बजे अध्यक्ष से मिलने के लिए कहा गया था. उसी दिन, कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बनर्जी से 11 घंटे तक पूछताछ की जा रही थी.

पार्टी के लोकसभा सांसद कीर्ति आज़ाद ने अध्यक्ष कार्यालय को सूचित किया कि चूंकि बनर्जी के पास उनके ईमेल की पहुंच (एक्सेस) नहीं है, इसलिए पूछताछ समाप्त होने के बाद उन्हें सूचित किया जाएगा. इस बीच, आज़ाद ने जाकर बिरला से मुलाकात की.

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