श्रवण गर्ग  | सरकार कन्फ्यूजन में है कि राहुल गांधी से लड़ाई लड़े कि नहीं लड़े

राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने पहुंचकर पैलेट गन से घायल युवा प्रदर्शनकारी साहिल लोचब की एफआईआर दर्ज कराने की मांग के बाद राजनीतिक टकराव एक बार फिर तेज हो गया है. ‘हरकारा  डीप डाइव’ में निधीश त्यागी के साथ वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने इस पूरे घटनाक्रम को सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते संघर्ष के संदर्भ में समझाया.

श्रवण गर्ग के मुताबिक, राहुल गांधी लगातार सरकार को सीधे टकराव के लिए चुनौती दे रहे हैं, लेकिन सरकार हर बार संघर्ष की स्थिति बनाने के बाद पीछे हटती दिखाई दे रही है. संसद मार्ग थाने में पहले एफआईआर दर्ज करने से इनकार किया गया, पुलिस ने "ऊपर से आदेश" की बात कही और राहुल गांधी के धरने पर बैठने के बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज कर ली गई.

गर्ग इसे सरकार की असमंजस की स्थिति से जोड़ते हैं. उनके मुताबिक, देश इस समय "तप रहा है", लेकिन सरकार को यह दिखाई नहीं दे रहा. वह इसे बुखार से पीड़ित ऐसे व्यक्ति से जोड़ते हैं जिसके हाथ ठंडे हैं. उनके अनुसार, ऊपर से सरकार काम करती हुई दिखाई दे रही है, लेकिन भीतर से उसका शासन तंत्र हिल चुका है.

बातचीत में 20 जुलाई के आंदोलन के बाद बने राजनीतिक माहौल, छात्रों के प्रदर्शन, पैलेट गन के इस्तेमाल और सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति पर भी चर्चा होती है. श्रवण गर्ग सवाल उठाते हैं कि अगर सरकार को लगता है कि विपक्ष अराजकता फैला रहा है तो वह उससे सीधे राजनीतिक मुकाबला क्यों नहीं करती.

इस चर्चा में प्रधानमंत्री के लाल किले के भाषण के बाद "दिमागी नक्सल" शब्द को लेकर बनी बहस, वंदे मातरम को लेकर सरकार का रुख और भाजपा की सोशल मीडिया रणनीति भी चर्चा के केंद्र में रहती है. गर्ग का कहना है कि सरकार के पास राहुल गांधी के खिलाफ राजनीतिक जवाब देने के बजाय अलग-अलग मोर्चों पर बिखरी हुई प्रतिक्रियाएं दिखाई दे रही हैं.

बातचीत का एक अहम हिस्सा यह भी है कि क्या पूरा विपक्ष राहुल गांधी के साथ खड़ा हो रहा है और क्या लगातार हो रहे प्रदर्शनों के कारण सरकार दबाव में है. राजस्थान, प्रयागराज, पुणे और अन्य जगहों पर विपक्षी कार्यक्रमों की अनुमति और फिर उस पर लगाई गई पाबंदियों का जिक्र करते हुए गर्ग कहते हैं कि सरकार बार-बार "अड़ रही है, फिर झुक रही है".

अंत में सवाल यही है कि क्या सरकार राहुल गांधी के साथ निर्णायक राजनीतिक टकराव के लिए तैयार है या वह लगातार रक्षात्मक होती जा रही है. श्रवण गर्ग के अनुसार, फिलहाल सरकार "आईसीयू में नहीं, वार्ड में" है, लेकिन उसके सामने यह चुनौती जरूर है कि वह इस राजनीतिक दबाव का जवाब कब और किस तरह देती है.

पूरी बातचीत यहां सुन सकते हैं.

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