पेंगुइन इंडिया ने सोनिया गांधी के संस्मरण में मोदी, आरएसएस और चीन से जुड़े अंशों में कटौती की मांग की थी
कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का 'पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया' (पीआरएचआई) के साथ किताब का सौदा इसलिए टूट गया क्योंकि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के वैचारिक स्रोत - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), और चीनी घुसपैठ से जुड़े संदर्भों में बदलाव या उन्हें हटाने से इनकार कर दिया था. दरअसल, 79 वर्षीय सोनिया गांधी का रुख था कि यह उनकी कहानी है और अपने जीवन के वृत्तांत में किसी भी तरह के फेरबदल की अनुमति देने का सवाल ही नहीं उठता.
सुनेत्रा चौधरी के अनुसार, पेंगुइन की एक छाप (इंप्रिंट) 'अल्फ्रेड ए नोफ' द्वारा इस संस्मरण 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' को 10 नवंबर को दुनिया भर में जारी किए जाने की उम्मीद है. हालांकि हार्परकॉलिन्स ने पूछे जाने पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन वह भारत में इस किताब को प्रकाशित और वितरित करने के समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब है.
सोनिया गांधी के एक सहयोगी ने एचटी को उन कुछ हिस्सों के बारे में बताया जिन्हें पीआरएचआई हटवाना चाहता था. इनमें मुख्य रूप से मोदी के साथ उनकी बैठकों की यादें और टिप्पणियां शामिल थीं. सहयोगी ने पुष्टि की कि उन्होंने अपने बारे में मोदी की टिप्पणियों का विस्तार से जिक्र किया है और 2004 में गुजरात में एक सार्वजनिक रैली में उन्हें "जर्सी गाय" कहे जाने के एक वाकये का हवाला दिया है.
सहयोगी ने कहा, "राजनीति में उनका एक लंबा करियर रहा है, और इसलिए उनका संस्मरण व्यापक है. उन्होंने निश्चित रूप से प्रधानमंत्री के बारे में अपने विचार और उनके मिलने पर क्या हुआ, इसका ब्योरा दिया है. एक राजनीतिज्ञ के रूप में, वे बताती हैं कि इस मुद्दे को कैसे संभाला गया, लेकिन प्रकाशकों को इससे आपत्ति थी."
पीआरएचआई ने शुरुआत में कई अंशों पर आपत्ति जताई थी. आखिर में यह डील तीन या चार महत्वपूर्ण अंशों पर आकर टूट गई जिन्हें सोनिया गांधी ने हटाने से मना कर दिया था. पता चला है कि सोनिया गांधी ने संस्मरण में मोदी की तुलना अन्य प्रधानमंत्रियों से की है. हालांकि, यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि गांधी ने आरएसएस पर क्या लिखा है.
पीआरएचआई ने एक बयान जारी कर दावा किया कि यह कहना सही नहीं होगा कि उसने संस्मरण प्रकाशित न करने का फैसला इसलिए लिया क्योंकि गांधी ने संपादकीय बदलावों को खारिज कर दिया था. "एक प्रकाशक के रूप में, तथ्यों की जांच करना (फैक्ट-चेक) और लेखकों को ऐसे सुझाव देना जो उनकी किताबों के सर्वोत्तम हित में हों, हमारा विशेषाधिकार और जिम्मेदारी दोनों है. यह प्रकाशन प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है."
कांग्रेस ने इस बयान को खारिज कर दिया और कहा कि "अगर पेंगुइन ने दुनिया भर में इसे प्रकाशित किया है, तो पीआरएचआई का फैक्ट-चेकिंग का दावा हास्यास्पद है."
स्वतंत्र साहित्यिक एजेंटों ने इस संस्मरण का काम संभाला था, और अधिकांश कांग्रेस नेता इसकी पूरी सामग्री से अनजान हैं. पीआरएचआई ने भारत-चीन संबंधों और भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ के बारे में गांधी के संदर्भों पर आपत्ति जताई थी. सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मांग करते रहे हैं कि सरकार चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति पर सच सामने लाए. उन्होंने सरकार पर झूठे दावे करने का आरोप लगाया है.
फरवरी में, संसद के बजट सत्र का एक बड़ा हिस्सा पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को लेकर बाधित रहा था, जिसे पीआरएचआई ने ही कमीशन किया था. विपक्षी दलों ने सदन की कार्यवाही बाधित करते हुए मांग की थी कि राहुल गांधी को इस पर बोलने की अनुमति दी जाए. अध्यक्ष ओम बिरला ने नियमों का हवाला देते हुए गांधी को नरवणे के संस्मरण से जुड़े एक लेख का संदर्भ देने की अनुमति नहीं दी. वरिष्ठ मंत्रियों ने भी इसका विरोध किया था.
यह गतिरोध तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी एक पत्रिका के लेख का हवाला देना चाहते थे जिसमें नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण के अंश शामिल थे. सदन के बाहर, गांधी नरवणे की किताब की एक प्रति लेकर आए थे और कहा था कि अगर प्रधानमंत्री संसद आएंगे तो वे इसे मोदी को भेंट करेंगे. उन्होंने दावा किया कि "किताब में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब चीनी सेना हमारी सीमा में दाखिल हुई थी, तो ऐसे नाजुक समय में सेना प्रमुख को इंतजार कराया गया था. और जब निर्णय लेने का समय आया, तो प्रधानमंत्री ने बस इतना कहा - 'आपको जो उचित लगे वह करें'." गांधी ने आरोप लगाया कि नरवणे ने लिखा था कि उन्हें लगा कि राजनीतिक नेतृत्व ने "सेना को अकेला छोड़ दिया है."
कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने पीआरएचआई के बयान को कमजोर बताते हुए उसकी आलोचना की. गोगोई ने ‘एक्स’ पर कहा, "पेंगुइन इंडिया 'एग्जाम वॉरियर्स' और आरएसएस पर कई किताबें प्रकाशित करके बेहद खुश है. इसमें कोई शक नहीं कि बीजेपी सरकार में कुछ लोग ऐसे हैं जो अब भारत के लोगों द्वारा पढ़ी जाने वाली किताब से डरने लगे हैं."

