संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट का निष्कर्ष: अगले पांच वर्षों में वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच सकता है
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की मौसम एजेंसी और ब्रिटेन के मौसम कार्यालय द्वारा गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले पांच वर्षों में औसत वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने का अनुमान है, जिसमें आर्कटिक (ध्रुवीय) क्षेत्रों का तापमान अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक तेजी से गर्म होने की संभावना है.
यह वार्षिक रिपोर्ट, जो तापमान और बारिश के क्षेत्रीय पूर्वानुमान देती है, अनुमान लगाती है कि वार्षिक वैश्विक औसत सतह-तापमान 1850-1900 के औद्योगिक-पूर्व काल की तुलना में 1.3°C से 1.9°C अधिक रहेगा. ब्रिटेन के मौसम कार्यालय की एक शोध वैज्ञानिक मेलिसा सीब्रुक ने ‘रॉयटर्स’ को बताया, "इसके बहुत स्पष्ट प्रमाण हैं कि जलवायु गर्म हो रही है और वैश्विक औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है."
2015 के पेरिस समझौते में, सरकारों ने औसत वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक-पूर्व स्तरों से 1.5°C से अधिक बढ़ने से रोकने का प्रयास करने का वादा किया था - क्योंकि इस स्तर से ऊपर जाने पर गंभीर जलवायु घटनाओं की तीव्रता बढ़ने की आशंका जताई गई थी.
2024 का सबसे गर्म वर्ष होने का रिकॉर्ड टूटने की संभावना
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बात की पूरी संभावना है कि 2026 और 2030 के बीच कम से कम एक वर्ष के लिए वैश्विक औसत सतह-तापमान अस्थायी रूप से 1850-1900 के औसत स्तर से 1.5°C अधिक हो जाएगा.
यह भी अनुमान लगाया गया है कि 2026 और 2030 के बीच एक वर्ष ऐसा होगा जब औसत वैश्विक तापमान अब तक के सबसे गर्म वर्ष, 2024 के रिकॉर्ड को भी पार कर जाएगा. बता दें कि 2024 में तापमान पहली बार औद्योगिक-पूर्व युग से 1.5°C से अधिक ऊपर निकल गया था.
सीब्रुक ने कहा कि अस्थायी रूप से 1.5°C की सीमा को पार करने का मतलब यह नहीं है कि पेरिस समझौता विफल हो गया है, क्योंकि यह समझौता किसी एक वर्ष के बजाय 20 वर्षों के दीर्घकालिक औसत को संदर्भित करता है. हालांकि, उन्होंने यह भी सचेत किया कि जैसे-जैसे दुनिया इस सीमा के करीब पहुंच रही है, इसके बार-बार पार होने की संभावना बढ़ती जा रही है. उन्होंने आगे कहा, "विज्ञान बहुत स्पष्ट है कि वैश्विक औसत तापमान को 1.5 डिग्री तक सीमित रखने का समय तेजी से खत्म हो रहा है."
अधिक गंभीर मौसमी घटनाएं
रिपोर्ट के अनुसार, अगले पांच वर्षों में उत्तरी गोलार्ध में आर्कटिक की सर्दियों का तापमान वैश्विक औसत की तुलना में 3.5 गुना से अधिक बढ़ने का अनुमान है, जो 1991-2020 के बेसलाइन से लगभग 2.8°C ऊपर पहुंच जाएगा.
अगले आधे दशक में मार्च के महीने में बैरेंट्स सागर, बेरिंग सागर और ओखोत्स्क सागर में आर्कटिक की समुद्री बर्फ (सी-आइस) पिघलने की आशंका है. सीब्रुक ने कहा कि आर्कटिक के गर्म होने से मौसम प्रणालियां बाधित हो सकती हैं और विशेष रूप से दुनिया के उत्तरी हिस्सों में अधिक गंभीर मौसमी घटनाएं सामने आ सकती हैं.
अगली पांच सर्दियों के दौरान उत्तरी गोलार्ध में अधिक नमी वाले (गीले) मौसम का अनुमान है, साथ ही मई-सितंबर के दौरान उत्तरी यूरोप, अलास्का, साइबेरिया और साहेल में भारी बारिश के दौर का अनुमान है. इसके विपरीत, इसी सीजन में अमेज़न में सूखे मौसम का पूर्वानुमान है.
सीब्रुक ने बताया कि इस साल सर्दियों में एक मजबूत 'अल नीनो' की भी भविष्यवाणी की गई है, जो 2027 तक जारी रह सकता है. प्रशांत महासागर के गर्म होने के कारण यह वैश्विक तापमान को संभावित रूप से रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर ले जा सकता है.
'अल नीनो' केंद्रीय और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान का समय-समय पर होने वाला एक क्रमिक तापन (वॉर्मिंग) है, जो आमतौर पर नौ से बारह महीनों तक रहता है.

