‘अविश्वसनीय; पहले जंगल काटे, अडानी को सौंपे और अब गर्मी पर लेक्चर दे रहे हैं’: मोदी की एडवाइजरी की आलोचना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नागरिकों से भीषण गर्मी के बीच पर्याप्त पानी पीने और कमजोर वर्गों की रक्षा करने का आग्रह किया, लेकिन सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं (यूजर्स) ने इस पर तीखी और व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी. उनका तर्क था कि बिगड़ते गर्मी के संकट से निपटने के लिए केवल सार्वजनिक सलाह देने के बजाय सरकार के मजबूत हस्तक्षेप की जरूरत है.

‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “भारत के विभिन्न हिस्सों में तापमान बढ़ रहा है और इससे जुड़ी चुनौतियाँ सामने आ रही हैं. यह गर्मी हम सभी के लिए कठोर है और मैं आप सभी से यथासंभव सावधानी बरतने का आग्रह करता हूँ.”

कुछ उपयोगकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि प्रधानमंत्री का खुद को "एसी कमरा, एसी घर, एसी कार, एसी बाथरूम" में रहते हुए गर्मी से जूझ रहे आम नागरिकों के बराबर बताना गलत था. जहाँ कुछ लोगों ने कहा कि राजनेताओं को बिना पंखे या एयर कंडीशनर के एक दिन बाहर बिताना चाहिए, वहीं अन्य लोगों ने एयर कंडीशनर को टैक्स-मुक्त करने और बसों व ट्रेनों को पूरी तरह से वातानुकूलित (एसी) बनाने की मांग की.

प्रधानमंत्री का फैशन और स्टाइल सेंस भी ऑनलाइन मजाक का हिस्सा बन गया, जिसमें एक यूजर ने मज़ाक करते हुए लिखा कि नरेंद्र मोदी को अपने घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि वह इतने "हॉट" हैं कि अकेले उनकी उपस्थिति से तापमान 5 से 6 डिग्री तक बढ़ सकता है.

पर्यावरण नीतियों और बुनियादी मुद्दों पर घेरा

आलोचकों ने मोदी की इस हीट एडवाइजरी (गर्मी से जुड़ी सलाह) की तुलना सरकार की पर्यावरण नीतियों से की. उन्होंने आरोप लगाया कि हसदेव, अंडमान और निकोबार, और अरावली के जंगलों में "लाखों पेड़" काट दिए गए और अडानी समूह को सौंप दिए गए.

एक व्यक्ति ने टिप्पणी की कि सरकार महंगाई या बेरोजगारी के बारे में तो शायद ही कभी ट्वीट करती है, लेकिन जब भी ज्ञान देने का समय आता है, तो "दो या तीन ट्वीट दनादन आ जाते हैं."

हाल ही में ईंधन की बचत के लिए किए गए उपायों पर भी लोगों की नजर रही. आलोचकों ने मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों पर मोदी के काफिले (कॉन्वॉय) को छोटा करने के फैसले को सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट बनाने का आरोप लगाया. एक यूजर ने कहा कि ई-रिक्शा की प्रतीकात्मक सवारी करने के बावजूद, मंत्रियों के पीछे बड़ा काफिला चलता रहता है और इसके बाद वे ईंधन संरक्षण का उपदेश देने लगते हैं.

एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “मोदी जी, आप अविश्वसनीय हैं — पहले जंगल साफ कर दिए, और अब लोगों को गर्मी से निपटने का लेक्चर दे रहे हैं.” गर्मी के कारण बढ़ने वाली बीमारियों और मौतों पर प्रधानमंत्री की चुप्पी की भी आलोचना हुई.

दिल्ली में पानी का संकट और मंत्रियों पर निशाना

दिल्ली के लोग भी मोदी की सलाह को स्वीकार करने के मूड में नहीं दिखे. कई यूजर्स ने भाजपा सरकार के तहत पीने के पानी के संकट को रेखांकित किया और शिकायत की कि सत्ता में बैठा कोई भी व्यक्ति आम नागरिकों की सुनने को तैयार नहीं है.

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपनी पुरानी सलाह को लेकर दोबारा चर्चा में आ गए, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया था कि प्याज खाने से गर्मी से बचने में मदद मिलती है. एक यूजर ने पूछा, “प्याज खाने से गर्मी से निपटने में कैसे मदद मिलती है? या यह कोई मजाक है?” यह सवाल वास्तविक जिज्ञासा थी या सूक्ष्म कटाक्ष, यह बताना मुश्किल था.

कई उपयोगकर्ताओं ने तर्क दिया कि प्रधानमंत्री की "सहानुभूति" बरतने की अपील सरकार की एक उचित 'हीट एक्शन प्लान' लागू करने की जिम्मेदारी को कम करती है और उसे गर्मी से होने वाली बीमारियों के प्रति जवाबदेही से मुक्त करती है.

इस बीच, अन्य लोगों ने प्रधानमंत्री को अपनी ओर से सलाह देकर जवाब दिया. एक यूजर ने सुझाव दिया कि मोदी को "गर्मियों के दौरान सुबह भुने हुए चने का सत्तू" पीना चाहिए, इसे गर्मी के खिलाफ प्रभावी और पौष्टिक दोनों बताया.

मौतों का आंकड़ा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गर्मी के संकट के कारण कई राज्यों में मौतें हो चुकी हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 17 मौतें दर्ज की गई हैं, इसके बाद तेलंगाना (16), मध्य प्रदेश (14) और महाराष्ट्र (11) का स्थान है.

इसके साथ ही, सरकार समर्थक और दक्षिणपंथी हैंडल्स के बीच विपक्ष के नेताओं का मज़ाक उड़ाने का एक सिलसिला भी देखा गया, जिसमें उन्होंने सुझाव दिया कि विपक्षी नेता प्रधानमंत्री की अपील को मानने के बजाय डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और गर्मी की मार झेलना ज्यादा पसंद करेंगे.

 

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