‘पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहता’: राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक के चयन पर असहमति दर्ज की
‘द हिंदू’ में संदीप फुकन की खबर है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के अगले निदेशक की नियुक्ति पर निर्णय लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक मंगलवार (12 मई, 2026) शाम को हुई. इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) राहुल गांधी ने एक असहमति नोट प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने सरकार पर राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए एजेंसी पर "संस्थागत कब्जे" का आरोप लगाया.
प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले इस पैनल में विपक्षी नेता के अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत भी शामिल हैं. यह बैठक प्रधानमंत्री के 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित आवास पर हुई और एक घंटे से अधिक समय तक चली.
वर्तमान सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद का कार्यकाल 24 मई, 2026 को समाप्त होने वाला है. गांधी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' पर अपना कड़ा असहमति नोट साझा किया और सरकार पर चयन प्रक्रिया का "मजाक" उड़ाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "आपकी सरकार ने बार-बार सीबीआई का दुरुपयोग किया है, जिसका उद्देश्य भारत की प्रमुख जांच एजेंसी होना था, ताकि राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाया जा सके. ऐसे संस्थागत कब्जे को रोकने के लिए ही चयन समिति में विपक्ष के नेता को शामिल किया जाता है. खेद है कि आपने मुझे इस प्रक्रिया में किसी भी सार्थक भूमिका से वंचित रखना जारी रखा है.”
गांधी ने कहा कि बार-बार लिखित अनुरोध के बावजूद उन्हें पात्र उम्मीदवारों की 'सेल्फ-अप्रेजल' रिपोर्ट या '360-डिग्री' रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई. उन्होंने आगे कहा, "इसके बजाय, मुझसे यह उम्मीद की गई कि मैं पहली बार समिति की बैठक के दौरान ही 69 उम्मीदवारों के मूल्यांकन रिकॉर्ड की जांच करूँ. 360-डिग्री रिपोर्ट देने से तो मुझे साफ मना कर दिया गया. प्रत्येक उम्मीदवार के इतिहास और प्रदर्शन का आकलन करने के लिए इन रिकॉर्ड्स की विस्तृत समीक्षा महत्वपूर्ण है. बिना किसी कानूनी आधार के सूचना देने से यह जानबूझकर किया गया इनकार, चयन प्रक्रिया का मजाक बनाता है और यह सुनिश्चित करता है कि केवल आपके द्वारा पहले से तय उम्मीदवार ही चुना जाए."
विपक्ष के नेता ने पीएम मोदी को याद दिलाया कि उन्होंने 5 मई, 2025 को हुई पिछली बैठक में भी अपनी असहमति दर्ज की थी और 21 अक्टूबर, 2025 को उन्हें पत्र लिखकर एक निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया के लिए उपाय सुझाए थे.
"चयन समिति को महत्वपूर्ण जानकारी देने से इनकार करके, सरकार ने इसे महज एक औपचारिकता बना दिया है. विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैंप नहीं है. मैं इस पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में भाग लेकर अपने संवैधानिक कर्तव्य का परित्याग नहीं कर सकता. इसलिए, मैं कड़े शब्दों में अपनी असहमति दर्ज करता हूँ," राहुल गांधी ने कहा.
बता दें, यह महत्वपूर्ण समिति सीबीआई के अगले निदेशक के चयन को अंतिम रूप देने के लिए जिम्मेदार है. चयन प्रक्रिया संक्षिप्त सूची (शॉर्टलिस्ट) में शामिल अधिकारियों के एक पैनल से की जाती है. सूत्रों ने संकेत दिया कि विभिन्न राज्यों के कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सीबीआई के शीर्ष पद के लिए विचाराधीन सूची का हिस्सा हैं. जिन आईपीएस अधिकारियों के नामों पर विचार किए जाने की चर्चा है, उनमें पराग जैन, शत्रुजीत कपूर, योगेश गुप्ता, जी.पी. सिंह और प्रवीर रंजन शामिल हैं.

