केन-बेतवा: केंद्र ने विस्थापन और पुनर्वास से जुड़ी शिकायतों को सुलटाने की जिम्मेदारी मप्र सरकार पर डाली
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना से उत्पन्न विस्थापन और पुनर्वास से जुड़ी शिकायतों की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश सरकार पर डाल दी है. लोकसभा में विपक्षी सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्रालय ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) और भूमि अधिग्रहण अधिनियम को लागू करने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की है.
1980 की राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (एनपीपी) के तहत केन-बेतवा परियोजना में केन नदी पर दौधन बांध और 221 किमी लंबी नहर बनाकर अधिशेष जल को बेतवा नदी में स्थानांतरित किया जाना है. इससे 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है, लेकिन इसके कारण 7,000 से अधिक परिवार विस्थापित होंगे.
अभिनय लक्ष्मण के अनुसार, छतरपुर जिले में बारना नदी के जल में फांसी का फंदा डालकर और प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर स्थानीय लोग महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. जुलाई 2026 में 14 दिनों की भूख हड़ताल पर बैठे 'जय किसान संगठन' के कार्यकर्ता अमित भटनागर को पुलिस ने जबरन अस्पताल पहुंचाया और 150 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हटा दिया. विस्थापितों की प्रमुख मांगों में बढ़ा हुआ मुआवजा, पुनर्वास चयन में कथित अनियमितताओं की जांच और वन अधिकार कानून के तहत ग्राम सभाओं की वैध सहमति शामिल है.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने प्रभावितों की संख्या, मुआवजा वितरण स्थिति, ग्राम सभा की बैठकों और बिना पूरा मुआवजा दिए बेदखली के मामलों पर सवाल पूछे थे. राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि 'भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम, 2013' तथा 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' के तहत क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है. यद्यपि इस परियोजना का नेतृत्व केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय कर रहा है और जनजातीय कार्य मंत्रालय इसका नोडल निकाय एवं निगरानी समिति का हिस्सा है, फिर भी उसने शिकायतों के निवारण का दायित्व राज्य पर ही डाला है.
केंद्र ने दावा किया कि उसने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि वन अधिकार दावों का निपटारा किए बिना किसी भी नागरिक को बेदखल न किया जाए.

