‘मौत तो दूर की बात, एक भी व्यक्ति की हड्डी नहीं टूटी’, ‘दिल्ली पुलिस की तारीफ होनी चाहिए’: रिजिजू ने कहा  

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मंगलवार (18 अगस्त) को पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि “एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई” और पुलिस की “तारीफ होनी चाहिए.”

‘द वायर’ के अनुसार, रिजिजू की यह टिप्पणी तब आई है जब दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में कहा है कि 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. जहाँ रिजिजू ने बिहार के सिवान में एके-47 राइफल के इस्तेमाल से इनकार किया है, वहीं एक अलग हलफनामे में बिहार सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया है कि सिवान में प्रदर्शनकारियों पर हथियार का इस्तेमाल किया गया था लेकिन कोई घायल नहीं हुआ.

इसके अलावा, रिजिजू ने कहा कि एक भी व्यक्ति को गंभीर चोट नहीं आई है. हालाँकि, एक आरटीआई के जवाब से पता चला है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पैलेट गन से 10 लोग घायल हुए थे.

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के बाद, अस्पताल के रिकॉर्ड और पीड़ितों के बयानों से पता चला कि गंभीर चोटों की सूचना मिली है, जिनमें 25 वर्षीय इरशाद शेख, 19 वर्षीय दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र साहिल लोचब और आउटलुक पत्रिका में काम करने वाले एक 28 वर्षीय पत्रकार शामिल हैं. इसके अलावा दिल्ली में नूतन नाम की 32 वर्षीय महिला को भी गोली लगी थी.

इसके बावजूद, मंत्री ने किसी भी तरह की गोलीबारी से इनकार किया है और इसके बजाय पिछली कांग्रेस सरकारों के दौरान हुई कार्रवाई की ओर ध्यान खींचते हुए कहा कि तब “गोलीबारी में हज़ारों लोग मारे गए थे”, जबकि पिछले महीने हुए युवा प्रदर्शनों में एक भी व्यक्ति की जान नहीं गई.

रिजिजू की यह टिप्पणी एक साक्षात्कार में आई, जहाँ साक्षात्कारकर्ता ने मंत्री से पूछा “गोली तो चली है”, लेकिन रिजिजू ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा: “कहाँ चली?” जब साक्षात्कारकर्ता ने कहा कि एके-47 का इस्तेमाल किया गया था, तो रिजिजू ने यह समझाना शुरू किया कि प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई में एक भी व्यक्ति की मौत कैसे नहीं हुई.

उन्होंने कहा, “मैं इसे दोहराना चाहता हूँ ताकि आपके और लोगों के मन में यह साफ़ हो जाए. एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई, एक भी व्यक्ति की हड्डी नहीं टूटी.”

उन्होंने आगे कहा, “इतना बड़ा आंदोलन, हज़ारों लोग जमा हुए और छात्रों की आड़ में कई अपराधी आ गए. आधे से ज़्यादा लोग — चाहे आम आदमी पार्टी के हों, डफली बजाने वाले हों, भीम आर्मी के हों या समाजवादी पार्टी के हों — आए और लोगों को हिंसा के लिए उकसाया; फिर भी एक भी मौत नहीं हुई.” उन्होंने कहा, “अस्पताल में एक भी प्रदर्शनकारी गंभीर चोट के साथ भर्ती नहीं है.”

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