कोलकाता में मुस्लिम कॉलेज की उप-प्राचार्य के इस्तीफे के बाद एबीवीपी ने कमरे में गंगाजल छिड़का
'मकतूब मीडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता के सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज की उप-प्राचार्य डॉ. मोहम्मदी तरन्नुम के 23 घंटे लंबे छात्र आंदोलन के बाद इस्तीफा देने के अगले दिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों ने उनके कमरे में गंगाजल छिड़का और अगरबत्ती जलाई. छात्रों ने इसे पिछले तृणमूल कांग्रेस सरकार के प्रभाव को खत्म करने की कोशिश बताया.
एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने तरन्नुम के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उनके साथ तीखी बहस भी की. तरन्नुम ने आरोप लगाया कि घेराव के दौरान उन्हें उनके कमरे में ही रहने के लिए मजबूर किया गया और कमरे की लाइट तथा पंखा बंद कर दिया गया. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पानी और खाना जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी गईं.
तरन्नुम ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया और वह "साजिश की शिकार" हैं. हालांकि उनके इस्तीफे के पत्र में "कुछ अपरिहार्य पारिवारिक, स्वास्थ्य संबंधी और निजी कारणों" का उल्लेख किया गया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के दबाव में इस्तीफा दिया.
कॉलेज से पुलिस सुरक्षा में बाहर निकलते समय छात्रों के एक समूह ने नारे लगाए और उनकी कार को घेर लिया. तरन्नुम को बार-बार यह कहते हुए सुना गया, "मैंने इस्तीफा नहीं दिया, मैंने इस्तीफा नहीं दिया."
तरन्नुम ने कहा कि कुछ लोग छात्रों में अनुशासन लाने की कोशिशों के खिलाफ थे और उन्हें हटाने पर अड़े हुए थे. उन्होंने उच्च शिक्षा मंत्री से मामले में हस्तक्षेप की अपील की. उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता का समर्थन करने की बात भी कही.
उन्होंने अपने ऊपर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े होने के आरोपों को खारिज किया. तरन्नुम ने कहा कि अतीत में वह वामपंथी राजनीति से जुड़ी रही होंगी, लेकिन उन्होंने कभी किसी के हित में काम नहीं किया.
उन्होंने बताया कि उन्होंने कॉलेज की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष और उच्च शिक्षा मंत्री-प्रभारी कौस्तव बागची, उच्च शिक्षा विभाग और कलकत्ता विश्वविद्यालय को मामले की जानकारी देकर गतिरोध खत्म करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन किसी ने आगे आकर समाधान नहीं किया.
विवाद की शुरुआत 75 प्रतिशत उपस्थिति से
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब कॉलेज ने नोटिस जारी कर कहा कि कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति वाले छात्रों को ही सेमेस्टर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी.
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का दावा था कि भाजपा विधायक और वकील कौस्तव बागची ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले छात्रों को स्व-घोषणा पत्र जमा कराने के बाद परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा सकती है.
फॉर्म भरने की प्रक्रिया के दौरान उपस्थिति का मुद्दा फिर विवाद का केंद्र बना रहा. छात्रों के मुताबिक, बाद में यह तय किया गया कि परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 40 प्रतिशत उपस्थिति जरूरी होगी.
छात्रों ने दावा किया कि यदि 75 प्रतिशत उपस्थिति की शर्त लागू की जाती तो करीब 900 छात्रों में से लगभग 600 छात्र परीक्षा देने से वंचित हो सकते थे. उन्होंने यह भी दावा किया कि एक सेमेस्टर में 180 छात्रों में से 144 की उपस्थिति 40 प्रतिशत से कम थी.
मंत्री और उप-प्राचार्य के बीच आरोप-प्रत्यारोप
कौस्तव बागची ने तरन्नुम पर "छात्र-विरोधी व्यवस्था" बनाने का आरोप लगाया. हालांकि उन्होंने 75 प्रतिशत उपस्थिति की शर्त को तार्किक बताया. बागची ने कहा कि छात्रों को कई मुद्दों पर आवाज उठाने के कारण दबाव में रखा गया और सवाल किया कि कॉलेज प्रशासन छात्रों के साथ खुले और भयमुक्त माहौल में बातचीत क्यों नहीं कर सका.
गुरुवार को कॉलेज प्रशासन, छात्रों और बागची के बीच बैठक हुई. बैठक के बाद छात्रों को स्व-घोषणा पत्र के आधार पर परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का फैसला किया गया. हालांकि इस फैसले के बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ और कॉलेज परिसर में प्रदर्शन जारी रहा.
एबीवीपी ने इस्तीफे को बताया जीत
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने तरन्नुम के इस्तीफे को "छात्र अधिकारों की जीत" बताया. संगठन ने उन्हें "टीएमसी की कठपुतली" भी कहा.
दूसरी ओर, तरन्नुम ने अपने खिलाफ लगाए गए राजनीतिक आरोपों को खारिज किया और कहा कि उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के लिए अनुशासन की व्यवस्था कायम करने की कोशिश की थी. उनका आरोप है कि इसी वजह से उनके खिलाफ दबाव बनाया गया और अंततः उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा.
घटना के बाद उप-प्राचार्य के कमरे में गंगाजल छिड़कने और अगरबत्ती जलाने की कार्रवाई ने परीक्षा में उपस्थिति के मूल विवाद को धार्मिक और राजनीतिक विवाद में बदल दिया है. 23 घंटे के प्रदर्शन, दबाव में इस्तीफे के आरोप और इसके बाद कमरे के "शुद्धिकरण" की कार्रवाई ने कॉलेज परिसर में चल रहे विवाद को और गंभीर बना दिया है.

