‘बच्चा तो बच्चा ही होता है’: सुप्रीम कोर्ट ने 14 वर्षीय निशू आजाद को मिली धमकियों पर मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 14 वर्षीय निशू आजाद को मिल रही दुष्कर्म की धमकियों और उसके घर पर हुए पथराव के आरोपों पर बेहद गंभीर रुख अपनाया है. निशू ने कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व वाले छात्र विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया था. भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहन की पीठ ने कहा कि कानूनी कार्रवाई की मांग करने पर किसी पीड़िता या उसके परिवार को डराने-धमकाने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

खादीजा इरफान रहीम की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार से दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर), सुरक्षा इंतजामों और आरोपियों पर हुई कार्रवाई पर स्थिति रिपोर्ट (स्टैटस रिपोर्ट) तलब की है.

हमले की शेखी बघारने से बढ़ा विवाद

विवाद की शुरुआत तब हुई जब हिंदुत्व कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में निशू के पिता संजय पर हमला करने की बात स्वीकारी. वीडियो वायरल होने के बाद सीजेपी, बहुजन समाज पार्टी और भीम पार्टी ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने तक मार्च निकालकर प्राथमिकी दर्ज कराई. इस मुद्दे पर आवाज उठाने पर निशू को फिर धमकियां मिलने लगीं, जिसके बाद उसने 'एक्स' पर अश्लील संदेशों के स्क्रीनशॉट और घर पर पथराव के वीडियो साझा किए.

छात्र प्रदर्शनों की सुनवाई के दौरान वकील ने अदालत को बताया कि हमलावरों पर कार्रवाई के बजाय बच्ची पर ही एफआईआर दर्ज की गई है और उसके घर पर पथराव के वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने कहा, "यदि असामाजिक तत्व बच्चे के खिलाफ हिंसा कर खुलेआम घूम रहे हैं और उसे धमका रहे हैं, तो यह गंभीर बात है. बच्चा तो बच्चा ही होता है, उसकी सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए."

अदालत के मुख्य निर्देश: सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया गया कि वे निशू की एफआईआर पर त्वरित कार्रवाई और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करें. यूपी पुलिस पीड़िता और उसके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करे. मामले की निष्पक्ष जांच दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना पुलिस द्वारा की जाए.

सुनवाई के बाद निशू आजाद ने 'एक्स' पर सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई का आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि प्रशासन अदालत के निर्देशों का निष्ठापूर्वक पालन करेगा.

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