ईडी ने कोई आपत्ति नहीं की, दिल्ली की अदालत ने आई-पैक निदेशक विनेश चंदेल को जमानत दी

‘द हिंदू ब्यूरो’ के मुताबिक, दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार (30 अप्रैल, 2026) को राजनीतिक परामर्शदाता संस्था 'इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी' (आई-पैक) के निदेशक विनेश चंदेल को नियमित जमानत दे दी. यह फैसला तब आया जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनकी जमानत याचिका का विरोध नहीं किया.

चंदेल को केंद्रीय एजेंसी ने 13 अप्रैल को गिरफ्तार किया था, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से कुछ दिन पहले की बात है. राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के निदेशक और सह-संस्थापक चंदेल, चुनावी राज्य में एक कथित कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी हैं. उन्हें यह जमानत बंगाल में 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव का मतदान संपन्न होने के एक दिन बाद मिली है.

पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमित बंसल ने चंदेल द्वारा दायर जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया. अदालत ने दर्ज किया कि आवेदक के वकील ने पीएमएलए की धारा 45 का हवाला दिया और प्रस्तुत किया कि वर्तमान मामले में विशेष लोक अभियोजक को जमानत का विरोध करने का अवसर दिया गया था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, इसलिए इस मामले में 'दोहरी शर्तें' लागू नहीं होंगी.

ईडी ने आरोप लगाया है कि चंदेल हवाला सहित अनौपचारिक माध्यमों से धन स्थानांतरित करने और औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से बाहर लेनदेन करने में शामिल थे.

एजेंसी ने आगे दावा किया कि जाँच के दौरान दिए गए बयान एकत्र किए गए साक्ष्यों के साथ मेल नहीं खाते थे, और विभिन्न संस्थाओं के साथ किए गए कई वित्तीय लेनदेन का कोई स्पष्ट वैध उद्देश्य प्रतीत नहीं होता था.

‘लोकतंत्र का मजाक’: क्या बंगाल चुनाव के लिए गिरफ्तार किया था? आई-पैक संस्थापक को मिली जमानत के बाद सवाल

इस बीच आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि विनेश चंदेल  को यह जमानत इसलिए संभव हो सकी, क्योंकि ईडी ने याचिका का विरोध नहीं किया.

‘टीएनआईई ऑनलाइन’ के अनुसार, ‘आप’ नेता ने चुनाव के दौरान केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इसे "लोकतंत्र का मजाक" करार दिया. उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा: "क्या आपने कभी एजेंसियों द्वारा लोकतंत्र का इससे ज़बरदस्त मज़ाक देखा है? आप सभी ने देखा कि चुनाव आयोग ने क्या किया. आप सभी ने देखा कि ईडी ने क्या किया. आप सभी ने देखा कि कैसे केंद्र सरकार ने केंद्रीय सुरक्षा बलों को मैदान में झोंक दिया. मैं भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के समर्थकों से पूछना चाहता हूँ, 'क्या आप इसी तरह चुनाव जीतेंगे?”

उन्होंने दावा किया कि आई-पैक, जो पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए ममता बनर्जी की अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर रही थी, को मतदान से कुछ दिन पहले कार्रवाई का सामना करना पड़ा. उनके अनुसार, आई-पैक के कार्यालयों पर छापे मारे गए, इसके संस्थापक-निदेशक चंदेल को गिरफ्तार किया गया और कई कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाया गया.

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई ने आई-पैक संगठन पर दबाव बनाया, जिससे उनके चुनाव संबंधी काम प्रभावित हुए और कई कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया. उन्होंने कहा कि चुनाव के ठीक बाद मिली जमानत ईडी की कार्रवाईयों की टाइमिंग पर सवाल खड़े करती है.


Previous
Previous

श्रवण गर्ग | मोदी के डर से मुक्त होने का क्या यही सबसे अच्छा अवसर नहीं है ?

Next
Next

बंगाल के चुनावी रण में केंद्रीय बलों की ज्यादती के आरोप और राजनीतिक तनाव